BCCI, जसप्रीत बुमराह पर निर्भरता कम करने के लिए नए टेस्ट तेज गेंदबाज तैयार कर रहा है। WTC फाइनल से चूकने पर तुषार देशपांडे जैसे युवाओं को मौका मिल सकता है। इसका लक्ष्य भविष्य के लिए एक मजबूत तेज गेंदबाजी यूनिट बनाना है।
नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) टेस्ट क्रिकेट में टीम के तेज गेंदबाजी डिपार्टमेंट के भविष्य को लेकर एक बड़े बदलाव की तैयारी में है। टीम के स्टार पेसर जसप्रीत बुमराह की चोट की समस्याओं और उनके वर्कलोड को ध्यान में रखते हुए, BCCI अब नए तेज गेंदबाजों को तैयार करने पर फोकस कर रहा है। खबर है कि अगर भारतीय टीम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल में पहुंचने से चूक जाती है, तो तुषार देशपांडे, गुरजपनीत सिंह और नचिकेत भूटे जैसे युवा तेज गेंदबाजों को टेस्ट टीम में मौका दिया जा सकता है।
बुमराह पर निर्भरता कम करने का प्लान
जसप्रीत बुमराह भारतीय टीम के सबसे बड़े बॉलिंग हथियार हैं, लेकिन उनकी लगातार चोटें चिंता का विषय बनी हुई हैं। आने वाले वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए उनका वर्कलोड मैनेज करना बेहद जरूरी है। BCCI का लक्ष्य एक ऐसी मजबूत बॉलिंग यूनिट तैयार करना है जो बुमराह की गैरमौजूदगी में भी टीम को संभाल सके। सेलेक्टर्स की नजर ऐसे गेंदबाजों पर है जो पिच से अच्छी स्पीड और बाउंस हासिल कर सकते हैं।
न्यूजीलैंड दौरे पर लिया जा सकता है बड़ा फैसला?
BCCI सूत्रों के मुताबिक, अगर न्यूजीलैंड दौरे तक यह साफ हो जाता है कि भारत WTC फाइनल की दौड़ से बाहर हो गया है, तो फौरन नए गेंदबाजों को आजमाया जाएगा। एक सूत्र ने बताया, "अगर न्यूजीलैंड सीरीज तक हमें पता चल जाता है कि हम WTC फाइनल में नहीं पहुंच सकते, तो हमें तुषार देशपांडे, गुरजपनीत सिंह और विदर्भ के नचिकेत भूटे जैसे तेज गेंदबाजों को ज्यादा मौके देने होंगे। इन गेंदबाजों के पास अच्छी रफ्तार है। जब तक हम उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका नहीं देंगे, हमें यह पता नहीं चलेगा कि वे टॉप लेवल पर कैसा प्रदर्शन करते हैं।"
शमी और सिराज की क्या है स्थिति?
फिलहाल, मोहम्मद सिराज टीम के दूसरे भरोसेमंद तेज गेंदबाज बने हुए हैं। लेकिन मोहम्मद शमी की कहानी कुछ अलग है। लंबी चोट के बाद रणजी ट्रॉफी में बंगाल के लिए शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद, शमी को फिलहाल टीम के प्लान से बाहर रखा गया है। इससे संकेत मिलता है कि शमी अभी BCCI की तत्काल योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं।
2024-25 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जब भारत 1-3 से सीरीज हारा था, तब बुमराह पर टीम की अत्यधिक निर्भरता साफ दिखी थी। जब बुमराह विकेट नहीं ले पाए, तो भारतीय गेंदबाजी संघर्ष करती नजर आई। पिछले साल इंग्लैंड दौरे पर भारत ने सीरीज 2-2 से ड्रॉ कराई थी, जिसमें बल्लेबाजी ने अहम भूमिका निभाई थी। उस दौरे पर बुमराह की गैरमौजूदगी के बावजूद बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को मौका नहीं मिला था। अंशुल काम्बोज को एक टेस्ट में मौका दिया गया, लेकिन फिर उन्हें जारी नहीं रखा गया। मौजूदा श्रीलंका सीरीज के लिए औकिब नबी को टीम में शामिल किया गया है। साफ है कि BCCI भविष्य के टेस्ट मैचों के लिए अपनी तेज गेंदबाजी को मजबूत करने के लिए अभी से नए चेहरों की तलाश और उन्हें परखने में जुट गया है।
