गौतम गंभीर खिलाड़ी (2007) और कोच (2026) के तौर पर T20 वर्ल्ड कप जीतने वाले पहले व्यक्ति बने। ICC फाइनल्स में अजेय रहते हुए यह उनका चौथा खिताब है। उनकी कोचिंग में टीम इंडिया ने आक्रामक बल्लेबाज़ी का अंदाज़ अपनाया है।

अहमदाबाद: टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने ICC पुरुष T20 वर्ल्ड कप के इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जो आज तक कोई नहीं कर पाया। नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हुए रोमांचक फाइनल में भारत ने न्यूज़ीलैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही गंभीर दुनिया के पहले ऐसे इंसान बन गए, जिन्होंने बतौर खिलाड़ी (2007) और फिर कोच (2026) T20 वर्ल्ड कप जीता हो। यही नहीं, इस जीत से ICC फाइनल्स में कभी न हारने का उनका रिकॉर्ड भी कायम रहा।

ये वर्ल्ड कप जीत उन आलोचकों को भी करारा जवाब है, जो गंभीर की टीम सिलेक्शन और रणनीतियों पर सवाल उठा रहे थे। यह गंभीर का चौथा ICC खिताब है - दो बतौर खिलाड़ी और दो बतौर कोच। कोचिंग से पहले ही गंभीर बड़े मैचों के खिलाड़ी के तौर पर अपनी पहचान बना चुके थे। 2007 T20 वर्ल्ड कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 54 गेंदों में 75 रन बनाकर उन्होंने ही भारत की जीत की नींव रखी थी। इसी तरह 2011 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में जब श्रीलंका के खिलाफ सचिन और सहवाग जल्दी आउट हो गए थे, तब गंभीर ने दबाव में 97 रनों की पारी खेलकर भारत को खिताब दिलाया था।

कोच के तौर पर शानदार सफर

गंभीर ने 2024 T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद राहुल द्रविड़ की जगह भारतीय टीम के कोच का पद संभाला था। 2025 में गंभीर की कोचिंग में ही भारत ने 12 साल का सूखा खत्म करते हुए चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। गंभीर के आने के बाद से टीम इंडिया ने बैटिंग का आक्रामक अंदाज़ अपनाया है। पिछले 20 महीनों में भारत ने 16 बार 200 से ज़्यादा का स्कोर बनाया है। वहीं, छह बार टीम 250 रनों के पार भी गई।

भारत का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर (297 रन) भी इसी दौरान बना। गंभीर के दौर में भारतीय बल्लेबाज़ों का औसत स्ट्राइक रेट 158.09 रहा है, जो ICC के फुल मेंबर देशों में सबसे ज़्यादा है। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि रोहित शर्मा ने जिस आक्रामक खेल की शुरुआत की थी, गौतम गंभीर उसे एक नए लेवल पर ले जाने में कामयाब रहे।