भारतीय टीम से नज़रअंदाज़ मोहम्मद शमी ने रणजी ट्रॉफी में शानदार वापसी की है। बंगाल के लिए सेमीफाइनल में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के खिलाफ 90 रन देकर 8 विकेट झटके। इस प्रदर्शन से उन्होंने टीम में वापसी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत की है।

कोलकाता: भारतीय टीम में लगातार नज़रअंदाज़ किए जाने के बावजूद, भारतीय तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी ने घरेलू क्रिकेट में शानदार गेंदबाज़ी का प्रदर्शन किया है। रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में बंगाल के लिए खेलते हुए शमी ने जम्मू-कश्मीर के खिलाफ 90 रन देकर आठ विकेट झटके। शमी की इस ज़बरदस्त गेंदबाज़ी की बदौलत बंगाल ने जम्मू-कश्मीर के खिलाफ पहली पारी में अहम बढ़त हासिल की। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए बंगाल पहली पारी में 328 रन पर ऑल आउट हो गई थी, जिसके जवाब में जम्मू-कश्मीर को 302 रन पर समेटकर बंगाल ने बढ़त बना ली।

मैच के दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर के टॉप ऑर्डर को परेशान करने वाले शमी ने तीसरे दिन निचले क्रम को भी समेट दिया। सुबह पिच पर मौजूद नमी का फायदा उठाते हुए शमी ने अपनी ट्रेडमार्क सीम गेंदबाज़ी से बल्लेबाज़ों को खूब नचाया। जम्मू-कश्मीर के लिए संघर्ष कर रहे अब्दुल समद (82) और कप्तान पारस डोगरा (58) की साझेदारी को तोड़कर शमी ने बंगाल को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

2023 वनडे वर्ल्ड कप के बाद चोट और सर्जरी की वजह से लंबे समय तक टीम से बाहर रहे शमी को हाल ही में जारी BCCI के सालाना कॉन्ट्रैक्ट में भी जगह नहीं मिली थी। लेकिन रणजी ट्रॉफी में गुजरात और सर्विसेज के खिलाफ पांच विकेट लेने वाले शमी ने सेमीफाइनल में आठ विकेट लेकर एक बार फिर सेलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

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लंबे स्पेल फेंकने की ताकत और पुरानी रफ़्तार वापस पाने के बाद अब अजित अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति के लिए उन्हें नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा। अगर बंगाल रणजी फाइनल में पहुंचता है, तो फाइनल में शमी का प्रदर्शन भारतीय टीम में उनकी वापसी के लिए अहम हो सकता है। माना जा रहा है कि शमी का लक्ष्य अगले साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप टीम में जगह बनाना है, ठीक वैसे ही जैसे ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट में चमककर वर्ल्ड कप टीम में जगह बनाई थी। ऐसा माना जाता है कि चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर के खिलाफ विवादास्पद बयान देने की वजह से ही शमी को भारतीय टीम से बाहर किया गया और सालाना कॉन्ट्रैक्ट से भी हटाया गया।