हार्दिक पंड्या की कप्तानी और व्यक्तिगत प्रदर्शन में गिरावट के कारण मुंबई इंडियंस संघर्ष कर रही है। टीम 22 खिलाड़ी आज़माने के बाद भी सही संयोजन नहीं ढूंढ पाई है, जिससे प्लेऑफ की राह कठिन हो गई है।

सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच चल रहा था। पावरप्ले का आखिरी ओवर जसप्रीत बुमराह फेंक रहे थे। पांचवीं गेंद, बैक ऑफ द लेंथ डिलीवरी। अभिषेक शर्मा क्रीज से बाहर निकले और बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से आसानी से छक्का जड़ दिया। इसके बाद मैदान पर एक अजीब सा सीन था। कुछ महीने पहले भारत को वर्ल्ड कप जिताने वाले तीन बड़े खिलाड़ी - बुमराह, हार्दिक पंड्या और सूर्यकुमार यादव - एक दूसरे के पास खड़े थे। लेकिन उनके पास एक-दूसरे को देने के लिए न तो कोई सलाह थी और न ही कोई नई रणनीति। तीनों बस लाचार से खड़े थे।

वानखेड़े में जब हैदराबाद जीत की तरफ बढ़ रही थी, तो क्रिकेट की दुनिया को एक और तस्वीर देखने को मिली। गहरी निराशा में अपना चेहरा छिपाते रोहित शर्मा। वही रोहित, जिनकी कप्तानी के दम पर मुंबई इंडियंस ने अपनी पूरी विरासत खड़ी की थी। तो क्या मुंबई पर पांच खिताबों का बोझ भारी पड़ रहा है, या फिर हार्दिक पंड्या की कप्तानी में ही कोई कमी है? क्या सिर्फ हार्दिक को ही कटघरे में खड़ा करना सही है?

हार्दिक, यानी कप्तान

आईपीएल इतिहास की सबसे सनसनीखेज ट्रेड के बाद 2024 में हार्दिक की मुंबई में 'घर वापसी' हुई। टीम मैनेजमेंट ने नई पीढ़ी के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया और रोहित को कप्तानी से हटा दिया गया।

हार्दिक को यह कुर्सी मिलने की ठोस वजह भी थी। गुजरात टाइटंस के कप्तान के तौर पर उन्होंने पहले ही सीजन में टीम को चैंपियन बनाया और अगले सीजन में फाइनल तक पहुंचाया। वहीं दूसरी तरफ, मुंबई इंडियंस तीन साल से फाइनल में नहीं पहुंची थी।

लेकिन गुजरात और मुंबई में जमीन-आसमान का फर्क है। मुंबई आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक है। यहां मैनेजमेंट और फैंस की उम्मीदें आसमान छूती हैं और ड्रेसिंग रूम सितारों से भरा है। इन सबके बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।

लगभग ढाई सीजन के बाद मुड़कर देखें तो लगता है कि हार्दिक ऐसा करने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने जिन 36 मैचों में कप्तानी की, उनमें से 21 में टीम हारी है। वह मुंबई के इकलौते ऐसे कप्तान हैं (जिन्होंने 5 से ज्यादा मैचों में कप्तानी की हो) जिनके नाम जीत से ज्यादा हार हैं।

मैदान पर लिए गए उनके फैसले भी एक कप्तान के तौर पर उनके ग्राफ को ऊपर नहीं उठाते। हाल ही में हैदराबाद के खिलाफ शार्दुल ठाकुर को इम्पैक्ट सब के तौर पर लाया गया, लेकिन हार्दिक ने उनसे एक भी ओवर नहीं कराया। इस सीजन में ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे।

खिलाड़ी के तौर पर भी फेल

सिर्फ कप्तान ही नहीं, एक खिलाड़ी के तौर पर भी हार्दिक मुंबई के लिए कुछ खास नहीं कर पाए हैं। गुजरात के लिए 38 की औसत से रन बनाने वाले हार्दिक का औसत मुंबई में गिरकर 20 रह गया है। उनके स्ट्राइक रेट में भी भारी गिरावट आई है। इस सीजन में उन्होंने सिर्फ 128 रन बनाए हैं और 4 विकेट लिए हैं, जबकि भारत के इस प्रीमियम ऑल-राउंडर की इकॉनमी 13 के करीब है। इस सीजन में प्लेऑफ तक पहुंचना अब आसान नहीं है। देखना होगा कि क्या मुंबई मैनेजमेंट हार्दिक के अलावा किसी और कप्तान के बारे में सोचता है।

तो फिर कौन?

हालांकि, किसी और को कप्तान बनाना भी आसान नहीं है। या तो टीम को वापस रोहित शर्मा के पास जाना होगा। हार्दिक की गैरमौजूदगी में मैनेजमेंट ने सूर्यकुमार यादव को कप्तानी सौंपी थी। लेकिन सूर्या की हालत तो हार्दिक से भी खराब है। भले ही वह वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान रहे हों, लेकिन हाल के दिनों में उनके निजी प्रदर्शन में भारी गिरावट आई है।

मुंबई की बैटिंग लाइन-अप में हार्दिक के साथ-साथ सूर्यकुमार भी एक बड़ी चिंता का सबब हैं। हर मैच के बाद उनका बल्ला जैसे खामोशी से कह रहा हो कि उनका सुनहरा दौर बीत चुका है। वह एक ही तरीके से आउट हो रहे हैं और अपने शॉट सेलेक्शन में सुधार करने को तैयार नहीं दिखते।

लेकिन बॉलिंग में कहानी उल्टी है। गजनफार ही अकेले ऐसे बॉलर हैं जो लगातार विकेट ले रहे हैं। उनके अलावा कोई दूसरा नाम बताने के लिए नहीं है, यहां तक कि बुमराह भी नहीं। मुंबई इस सीजन में अब तक 22 खिलाड़ियों को आजमा चुकी है। किसी और टीम ने इतने एक्सपेरिमेंट नहीं किए हैं। यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि आठ मैच बीत जाने के बाद भी मुंबई को अपना सही कॉम्बिनेशन नहीं मिल पाया है।