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दुनिया के 5 फौलादी बल्लेबाज, जिनके क्रीज पर आते ही कांपते थे गेंदबाजों के पैर; एक नाम भारत से...!
5 Dangerous Batsmen in Cricket: क्रिकेट के मैदान एक से बढ़कर एक धांसू बल्लेबाज आए, जिन्होंने विश्व क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी का जलवा दिखाया। यहां हम आपको उन 5 खूंखार बल्लेबाजों के बारे में बताएंगे, जिनके जाने के बाद आज तक टीम को विकल्प नहीं मिला।

5 सबसे धाकड़ बल्लेबाज
विश्व क्रिकेट में इस समय एक से बढ़कर एक धांसू बल्लेबाज भरे हुए हैं, जो अपने बल्लेबाजी से किसी भी गेंदबाजों की नींद हराम कर देते हैं। लेकिन, आज हम आपको उन पांच बल्लेबाजों के बारे में जानकारी देंगे, जिन्होंने एक समय अपने बल्लेबाजी का खौफ पूरे विश्व में दिखाया था। इनके जैसा खिलाड़ी टीम को आज तक नहीं मिला। आइए इनके ऊपर नजर डालते हैं।
एबी डिविलियर्स
साउथ अफ्रीका के एबी डिविलियर्स उन धाकड़ बल्लेबाजों की सूची में आते हैं, जिनका खौफ आज भी गेंदबाजों के जहन में है। दुनिया में उन्होंने असली खौफ 18 जनवरी 2015 को पैदा कर दिया। वेस्टइंडीज के खिलाफ जोहान्सबर्ग के मैदान पर एबी ने बल्ले और ऐसी तबाही मचाई, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी। उन्होंने ODI में 44 गेंदों पर 149 रनों की पारी खेली। सिर्फ 31 गेंदों पर शतक जड़ दिया। 16 छक्के मारे। इसके अलावा भी कई यादगार इनिंग खेली। इनके जैसे बल्लेबाज आज भी साउथ अफ्रीका तलाश रही है।
एडम गिलक्रिस्ट
दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट का नाम आता है, जो अपने समय के डेंजरस बल्लेबाजों की श्रेणी में आते थे। वो बतौर विकेटकीपर व बल्लेबाज के तौर पर एक मैच विनर खिलाड़ी थे। भले उनके खेलने की शैली ज्यादा आक्रामक नहीं थी, लेकिन टाइमिंग और सिंपलीसिटी से सामने वाले गेंदबाजों को परेशान करते थे। उनकी सबसे बड़ी ताकत स्टेबिलिटी और अग्रेशन का परफेक्ट बैलेंस था। 2007 विश्व कप फाइनल में 149 रनों की पारी, इसका बड़ा उदाहरण है। उनके रिटायरमेंट के बाद ऑस्ट्रेलिया को कहीं विकेटकीपर/बल्लेबाज मिले, लेकिन गिलक्रिस्ट जैसा कोई नहीं रहा।
ब्रैंडन मैकुलम
न्यूजीलैंड के बल्लेबाज ब्रैंडन मैकुलम अपने समय के सबसे खतरनाक और प्रभावशाली बल्लेबाजों में से एक थे। वह टीम को तेज शुरुआत देते थे, गैप्स ढूंढते थे और जब उनका दिन हो तब गेंदबाजों के पास बचने का कोई विकल्प तक नहीं मिलता था। आईपीएल के पहले ही मैच में उन्होंने 158 रनों की पारी खेली थी, जिसे देख विश्व क्रिकेट हैरान हो गया था। इनकी बल्लेबाजी के आगे सामने वाले गेंदबाजों की नींद उड़ जाती थी। वह पहले ओवर से ही रन बढ़ा देते थे, जिससे मिडल ऑर्डर के बल्लेबाजों को खेलने के लिए ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता था। उनके जाने के बाद न्यूजीलैंड को धाकड़ ओपनर अभी तक नहीं मिला है।
क्रिस गेल
वेस्टइंडीज के धाकड़ बल्लेबाज क्रिस गेल को दुनिया यूनिवर्स बॉस के नाम से जानती है। टी20i, वनडे और टेस्ट तीनों फॉर्मेट में गेल का अंदाज एक जैसा ही रहा। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनके पास मौजूद फौलादी पावर थी। गेंद को करने के लिए किसी स्पेशल शॉट की जरूरत नहीं पड़ती थी। उनकी बल्ले से सिर्फ गेंद टाइमिंग होने के बाद भी 90 मीटर से ज्यादा दूर जाती थी। गेल की यही पावर उन्हें दुनिया का सबसे खूंखार बल्लेबाज बनाता था। पहली गेंद सही सामने वाली टीम दबाव में रहती थी, क्योंकि उन्हें पता था कि अगर यह 30 से 40 गेंद खेल गए, तो मैच एकतरफा हो जाएगा।
वीरेंद्र सहवाग
2000 के दशक में टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी तेज शुरुआत नहीं मिलना थी। टीम में अच्छे खिलाड़ी थे, लेकिन इनिंग की शुरुआत विस्फोटक दे, ऐसा कोई नहीं था। उसी समय वीरेंद्र सहवाग की एंट्री होती है और फिर क्रिकेट की परिभाषा बदल जाती है। टेक्निकल स्कूल की परिभाषा में वो फिट नहीं बैठते थे, लेकिन मैदान पर उनका खेल अलग लेवल का था। उनका साफ मंत्र था, पहली गेंद को भी उसी अंदाज में खेलो जैसे आखिरी को खेलते हैं। वो बिना किसी हड़बड़ाहट के सामान्य अंदाज में छक्के जड़ते थे। वो मेंटल फ्रीडम के मिशाल थे, जो शायद किसी भारतीय बल्लेबाज में दिखता हो। मुल्तान के 300 (टेस्ट), रांची के 319 (टेस्ट) और साउथ अफ्रीका के 219 (ODI) इसका उदाहरण है।