फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कौन-कौन से भारतीय मूल के खिलाड़ी अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे? भारतीय मूल के खिलाड़ी सरप्रीत सिंह, तहसीन मोहम्मद, निशान वेलुपिल्लई और सैमुअल मुतुसामी की पृष्ठभूमि क्या है? फीफा वर्ल्ड कप में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की वापसी 20 साल बाद क्यों खास मानी जा रही है?

नई दिल्ली: भले ही भारतीय फुटबॉल टीम फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई, लेकिन फैंस के लिए एक अच्छी खबर है। इस बार चार भारतीय मूल के खिलाड़ी वर्ल्ड कप में खेलते नजर आएंगे। ये चारों खिलाड़ी अलग-अलग देशों की टीमों का हिस्सा हैं। 24वां फीफा वर्ल्ड कप 12 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में खेला जाएगा। इसमें कुल 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। भारतीय मूल के ये खिलाड़ी न्यूजीलैंड, कतर, ऑस्ट्रेलिया और कांगो रिपब्लिक की टीमों में शामिल हैं। आइए जानते हैं इन चार खिलाड़ियों के बारे में।

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सरप्रीत सिंह (न्यूजीलैंड)

सरप्रीत के माता-पिता पंजाब के रहने वाले हैं, लेकिन उनका जन्म न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में हुआ। 27 साल के सरप्रीत 2018 में मुंबई में भारत के खिलाफ खेल चुके हैं। वह 2017 और 2019 में न्यूजीलैंड के लिए अंडर-20 फीफा वर्ल्ड कप भी खेल चुके हैं।

तहसीन मोहम्मद (कतर)

तहसीन के पिता जमशेद केरल के रहने वाले हैं और एक पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी भी हैं। जमशेद 2006 में कतर चले गए थे। उनके बेटे तहसीन ने 2024 में सिर्फ 18 साल की उम्र में कतर के लिए डेब्यू किया था। अब वह वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा हैं।

निशान वेलुपिल्लई (ऑस्ट्रेलिया)

निशान का जन्म मेलबर्न में हुआ। उनकी मां एंग्लो-इंडियन हैं और पिता श्रीलंकाई तमिल मूल के मलेशियाई हैं। निशान को 2024 में ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने का मौका मिला। उन्होंने अब तक कुल 7 मैच खेले हैं।

सैमुअल मुतुसामी (कांगो रिपब्लिक)

मुतुसामी के पिता भारत के तमिलनाडु से हैं, जबकि उनकी मां कांगो रिपब्लिक से हैं। उनका जन्म फ्रांस में हुआ था। वह 2019 से कांगो के लिए खेल रहे हैं। उन्होंने फ्रांस और तुर्की के क्लबों के लिए भी खेला है।

20 साल बाद दिखेंगे भारतीय मूल के खिलाड़ी

फीफा वर्ल्ड कप में पूरे 20 साल बाद भारतीय मूल के खिलाड़ी नजर आएंगे। इससे पहले 2006 में फ्रांस की टीम से विकास धोरासू खेले थे। उनके बाद अब पहली बार ऐसा हो रहा है।