लियोनेल मेसी ने अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच में हैट्रिक लगाकर वर्ल्ड कप में सर्वाधिक 16 गोल के रिकॉर्ड की बराबरी की। वह 6 वर्ल्ड कप खेलने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी भी बने और टूर्नामेंट में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए।
कैनसस सिटी: अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी एक-एक करके वर्ल्ड कप के सारे रिकॉर्ड तोड़ते जा रहे हैं। कैनसस सिटी के एरोहेड स्टेडियम में अल्जीरिया के खिलाफ अपना 200वां इंटरनेशनल मैच खेलते हुए मेसी ने शानदार हैट्रिक लगाई। इस हैट्रिक के साथ ही उन्होंने वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज़े के 16 गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इससे पहले एक मैच में सेनेगल के खिलाफ दो गोल करके फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे मेसी से आगे निकल गए थे, लेकिन अब इस हैट्रिक के दम पर मेसी ने उन्हें भी पीछे छोड़ दिया है। मेसी ने खेल के 17वें, 60वें और 76वें मिनट में गोल दागे। यह उनके करियर की पहली वर्ल्ड कप हैट्रिक है।

इस मैच में उतरते ही मेसी फुटबॉल इतिहास में 6 अलग-अलग वर्ल्ड कप खेलने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए। इसके साथ ही, वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा मैच खेलने का अपना ही रिकॉर्ड उन्होंने और बेहतर करते हुए 27 पर पहुंचा दिया। मैच के 17वें मिनट में रोड्रिगो डी पॉल के एक शानदार थ्रू पास पर मेसी ने बेहतरीन कर्विंग शॉट से गोल कर अर्जेंटीना को बढ़त दिलाई। इस गोल के साथ ही मेसी अर्जेंटीना के लिए वर्ल्ड कप में गोल करने वाले सबसे कम उम्र और सबसे ज्यादा उम्र के खिलाड़ी भी बन गए।
दूसरे हाफ की शुरुआत में ही मेसी ने अल्जीरिया के डिफेंस को छकाते हुए अपना दूसरा गोल किया और अर्जेंटीना को 2-0 से आगे कर दिया। इस गोल के साथ उन्होंने वर्ल्ड कप में 15 गोल करके ब्राजील के महान खिलाड़ी रोनाल्डो की बराबरी की। इसके तुरंत बाद, उन्होंने अपनी हैट्रिक पूरी की और मिरोस्लाव क्लोज़े के सबसे ज्यादा 16 गोलों के रिकॉर्ड के बराबर पहुंच गए। 38 साल के मेसी इस हैट्रिक के साथ वर्ल्ड कप में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए।
इस मैच में अल्जीरिया ने अर्जेंटीना को कड़ी टक्कर दी, लेकिन मेसी के जबरदस्त फॉर्म और गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज के शानदार बचावों की बदौलत अर्जेंटीना जीत हासिल करने में कामयाब रही। अब लियोनेल स्कालोनी की अर्जेंटीना टीम का लक्ष्य लगातार दो वर्ल्ड कप जीतने का है, ताकि वो इटली (1934, 1938) और ब्राजील (1958, 1962) के बाद ऐसा करने वाला तीसरा देश बनकर इतिहास रच सके।
