Vishwajit More Wrestler: महाराष्ट्र के कोल्हापुर के विश्वजीत मोरे ने अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2026 में 55 किलोग्राम ग्रीको-रोमन वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। जानें किसान परिवार से आने वाले इस भारतीय पहलवान का सफर और उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि।

Vishwajit More biography: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर विश्वजीत मोरे ने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में भारत का नाम रोशन किया है। किसान परिवार से आने वाले विश्वजीत ने अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह पुरुषों की ग्रीको-रोमन कुश्ती के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पहलवान बने। विश्वजीत ने 55 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल तक पहुंचने के लिए उन्होंने ईरान और रूस के पहलवानों को हराया। हालांकि, खिताबी मुकाबले में उन्हें जॉर्जिया के कोबा कारुमिजदे से कड़ी टक्कर मिली। वह 12-13 के करीबी अंतर से मुकाबला हार गए और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। आइए जानते हैं कौन हैं विश्वजीत मोरे और कैसा रहा उनका कुश्ती का सफर।

कौन हैं विश्वजीत मोरे?

विश्वजीत मोरे महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के सरवाड़े गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है। उनके पिता रामचंद्र मोरे खेत में सब्जियां उगाते हैं और उन्हें बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनकी मां पार्वती भी फसल कटाई के समय खेत में काम करती हैं। विश्वजीत के परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा एक दिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। विश्वजीत को बचपन से ही कुश्ती में दिलचस्पी थी। शुरुआत में परिवार को लगा कि यह उनका शौक है, लेकिन जब उन्होंने प्रतियोगिताओं में पदक जीतने शुरू किए, तो उनकी प्रतिभा का एहसास हुआ।

छह साल की उम्र में शुरू किया कुश्ती का सफर

विश्वजीत ने महज छह साल की उम्र में अपने गांव के अखाड़े में जाना शुरू कर दिया था। वहां वह दूसरे पहलवानों के साथ प्रैक्टिस करते थे। धीरे-धीरे कुश्ती के प्रति उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई और उन्होंने इसे अपना करियर बनाने का फैसला किया। कुश्ती में आगे बढ़ने के लिए रेगुलर प्रैक्टिस के साथ अच्छी डाइट की भी जरूरत होती है। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद उनके पिता ने बेटे का सपना पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने घर के दूसरे खर्चों में कटौती करके विश्वजीत की ट्रेनिंग और खानपान के लिए पैसे जुटाए।

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15 साल की उम्र में सेना से जुड़ने का मौका

विश्वजीत की मेहनत साल 2019 में रंग लाई। महज 15 साल की उम्र में उनका चयन बेलगाम की आर्मी बॉयज कंपनी में हो गया। यहां उन्होंने कोच सूबेदार रंजीत महादिक की देखरेख में ग्रीको-रोमन कुश्ती की ट्रेनिंग ली। शुरुआत में उन्हें इस कुश्ती शैली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन लगातार प्रैक्टिस से उन्होंने अपनी तकनीक बेहतर की। उन्होंने अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-20 स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक जीते।

तीन साल लगातार पदक जीतकर दिखाई प्रतिभा

विश्वजीत ने अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 2024, 2025 और 2026 संस्करणों में लगातार पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। 2026 में सिल्वर मेडल जीतना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि है। वह इस प्रतियोगिता के ग्रीको-रोमन वर्ग के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पहलवान बने। लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद विश्वजीत भारतीय सेना में हवलदार बने और सेना की मिशन ओलंपिक विंग में शामिल हुए।

विश्वजीत मोरे को लेकर सर्च किए जाने वाले सवाल

1. विश्वजीत मोरे कौन हैं?

विश्वजीत मोरे महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के पहलवान हैं। उन्होंने 2026 अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता।

2. विश्वजीत मोरे ने किस भार वर्ग में पदक जीता?

उन्होंने पुरुषों के 55 किलोग्राम ग्रीको-रोमन वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।

3. विश्वजीत मोरे के पिता क्या करते हैं?

उनके पिता रामचंद्र मोरे खेती करते हैं और खेत में उगाई गई सब्जियां बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।