Temple Twist: 5 मिनट में सिंदूर और बनी दुल्हन! औरंगाबाद में कृष्ण-लालती ने जाति बंधनों को तोड़ा, परिवार की मर्जी के बिना मंदिर में रचाई शादी। न फेरे, न बाजा… सिर्फ माला, सिंदूर और भगवान को साक्षी मानकर लिया साथ जीने-मरने का वादा!

Aurangabad love marriage: बिहार के औरंगाबाद जिले से एक अनोखी और भावुक करने वाली प्रेम कहानी सामने आई है, जहां एक प्रेमी जोड़े ने जाति-बंधनों को तोड़कर मंदिर में शादी कर ली। लड़के का नाम कृष्ण कुमार और लड़की का नाम लालती कुमारी है। दोनों ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर अपने रिश्ते को शादी में बदल दिया।

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जाति बनी प्यार की दीवार 

कृष्ण कुमार, मदनपुर थाना क्षेत्र के मन्जरेठी गांव का रहने वाला है, जबकि लालती कुमारी नवीनगर प्रखंड के माली गांव की निवासी है। दोनों की जाति अलग-अलग होने के कारण उनके परिवार इस रिश्ते से खुश नहीं थे। लेकिन प्यार ने उन्हें वह हिम्मत दी कि उन्होंने समाज की परवाह किए बिना मंदिर में सात जन्मों का साथ निभाने की कसम खा ली।

मदनपुर के सरस्वती मोहल्ला में हुई शादी 

मदनपुर के सरस्वती मोहल्ला स्थित एक मंदिर में कृष्ण और लालती ने एक-दूसरे को माला पहनाई, सिंदूर लगाया और भगवान को साक्षी मानकर विवाह कर लिया। यह शादी महज 5 मिनट में संपन्न हो गई — न कोई धूमधाम, न बैंड-बाजा, बस सच्चा प्यार और साहस।

प्यार की शुरुआत सेंटरिंग साइट से

कृष्ण एक सेंटरिंग वर्कर है। माली गांव में काम के दौरान उसकी मुलाकात लालती से हुई। दोनों ने एक-दूसरे का नंबर लिया और घंटों बातें करने लगे। धीरे-धीरे मुलाकातें बढ़ीं, होटल और झुंझुनूवा पहाड़ पर मिलने लगे। प्यार गहराता गया, लेकिन जैसे ही शादी की बात आई, जाति आड़े आ गई।

परिवार ने किया विरोध, फिर भी रुक नहीं पाया प्यार 

जब कृष्ण ने अपने घरवालों से शादी की बात की, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। लेकिन लालती के परिजन तैयार थे। दोनों ने घर से भागने का फैसला किया और मंदिर में शादी कर ली। शादी के दौरान लड़की के घर वाले मौजूद थे, लेकिन लड़के के परिजन नाराज होकर शामिल नहीं हुए। यह प्रेम विवाह अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग कृष्ण और लालती की हिम्मत और उनके सच्चे प्यार की मिसाल दे रहे हैं।