बिहार में शराबबंदी तो 2016 में चर्चा में आई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1938 में ही जगलाल चौधरी ने इसकी नींव रख दी थी? जानिए इस महापुरुष की कहानी, जिनकी जयंती पर राहुल गांधी पटना पहुंचे।

पटना। बिहार में अप्रैल 2016 में शराबबंदी कानून लागू किया गया। सीएम नीतीश कुमार को इस फैसले से काफी पॉपुलरिटी हासिल हुई। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि यह कानून बिहार में करीब आठ दशक पहले एक महापुरुष ने लागू कर दिखाया था। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री जगलाल चौधरी ने यह बड़ा फैसला लिया था। आज पटना में उनका जयंती समारोह मनाया जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी उसमें शामिल होने पटना पहुंचे हैं।

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बिहार में पहली बार 1938 में लागू हुई थी शराबबंदी

बिहार में शराबबंदी की शुरुआत 1938 में हुई, जब जगलाल चौधरी ने इसे पांच जिलों में लागू किया। यह कदम उस समय क्रांतिकारी माना जाता था, क्योंकि वह खुद एक ऐसे समुदाय से आते थे, जो ताड़ी (नशीला पेय) बेचकर अपनी जीविका चलाता था। बावजूद इसके, उन्होंने समाज में सुधार लाने के लिए शराबबंदी का फैसला लिया। तब बिहार की अंतरिम सरकार के सीएम कृष्णा सिंह थे और जगलाल चौधरी को आबकारी और लोक स्वास्थ्य विभाग का मंत्री बनाया गया था। आपको बता दें कि वह​ ​ऐसे पहले दलित नेता थे, जिन्हें बिहार कैबिनेट में जगह मिली थी। जिन जिलों में उन्होंने शराबबंदी लागू की थी, उनमें हजारीबाग, रांची, धनबाद, सारण और मुजफ्फरपुर जिले शामिल थे।

कौन थे जगलाल चौधरी?

जगलाल चौधरी का जन्म 5 फरवरी 1895 को बिहार के सारण जिले के गड़खा प्रखंड में हुआ था। हालांकि, कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों में उनके जन्म का वर्ष 1894 भी बताया गया है। उनका परिवार बहुत गरीब था और उनके पिता मुसन चौधरी ताड़ी बेचकर जीविका चलाते थे। उनकी माता तेतरी देवी थीं। ताड़ी बेचकर ही पिता ने उनकी पढ़ाई कराई। जगलाल चौधरी ने 1912 में छपरा जिला स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की और जिले में टॉप किया। 1914 में पटना कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद कलकत्ता के कैंपबेल मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया।

छुआछूत के खिलाफ लड़ाई में पहली जीत

जगलाल चौधरी ने मेडिकल कॉलेज में जातिगत भेदभाव का सामना किया। उन्हें अन्य छात्रों के साथ भोजन करने की अनुमति नहीं थी। इसके विरोध में उन्होंने भूख हड़ताल की, जिससे साथी छात्र उन्हें अपने साथ खाने की अनुमति देने के लिए मजबूर हो गए।

स्वतंत्रता संग्राम में हुए शामिल

महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के आह्वान पर उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। वे बिहार राज्य कांग्रेस समिति के सदस्य बने और नमक सत्याग्रह में भाग लिया। उन्होंने अस्पृश्यता विरोधी आंदोलनों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और जेल गए।

स्त्री-पुरुषों को समान अधिकार देने की वकालत

उन्होंने 1953 में ‘ए प्लान टू रिकंस्ट्रक्ट भारत’ नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने डॉ. आंबेडकर के विचारों का समर्थन किया। सभी वर्गों के स्त्री-पुरुषों को समान अधिकार देने की वकालत की।

राहुल गांधी के बिहार दौरे के क्या मायने?

राहुल गांधी बिहार में पहली बार जगलाल चौधरी की जयंती मनाने पहुंचे। माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस की दलित राजनीति को बल मिल सकता है। यह कांग्रेस के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

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