बिहार चुनाव 2025 से पहले, तेज प्रताप यादव ने सीतामढ़ी रैली में 'जय श्री राम' के नारे को अधूरा बताया। उन्होंने जानकी की धरती का हवाला देते हुए 'जय सिया राम' कहने पर जोर दिया।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की सियासी हलचल चरम पर है। इस बीच तेज प्रताप यादव, जो राजद से अलग होकर अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ बना चुके हैं, राज्य के विभिन्न हिस्सों में चुनावी दौरे पर हैं। हाल ही में तेज प्रताप यादव सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर पहुंचे और वहां आयोजित रैली में जनता को संबोधित किया।

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रैली में हुआ विवाद

जैसे ही तेज प्रताप यादव मंच पर पहुंचे, भीड़ में उत्साह फैल गया और लोग जोर-जोर से ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने लगे। इस पर तेज प्रताप यादव भड़क गए उन्होंने तुरंत माइक्रोफोन संभाला और लोगों को रोकते हुए कहा कि यह नारा अधूरा है। उनका कहना था कि राम का नाम ज़रूर है लेकिन इसमें सीता माता का नाम शामिल नहीं है। इसलिए नारा सही तरह से ‘जय सिया राम’ होना चाहिए।

तेज प्रताप ने कहा, “यह जानकी की धरती है। इस धरती पर सीता माता और भगवान राम दोनों का सम्मान करना हमारा धर्म है। इसलिए जो लोग सिर्फ ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे हैं, वह गलत कर रहे हैं। हमें पूरा नारा ‘जय सिया राम’ बोलना चाहिए।”

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

तेज प्रताप यादव का यह बयान तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में उनके भाषण और नारे बदलने की बात को लोग तेजी से शेयर कर रहे हैं। समर्थक उनके इस कदम की सराहना कर रहे हैं और इसे सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बता रहे हैं।

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तेज प्रताप की बात के राजनीतिक मायने

पॉलिटिकल पंडितों का कहना है कि तेज प्रताप यादव अपनी नई पार्टी के लिए अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक राजद नीतियों और अपने पिता लालू यादव की राजनीतिक विरासत से दूरी बनाते हुए खुद को नए चुनावी खेमे में स्थापित किया है। ‘जय सिया राम’ का नारा उनके चुनावी संदेश का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को जोड़ना चाहते हैं।

रैली में तेज प्रताप यादव ने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी राज्य के अधिक से अधिक जिलों में सक्रिय होगी। उन्होंने कहा कि जनता को सीधे संवाद के माध्यम से जोड़ेंगे और अपनी नई पार्टी को मजबूत करेंगे। उनके इस रुख से राजद और एनडीए दोनों के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ सकती है।