बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने स्थानीय नेतृत्व से मतभेद के कारण पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने चुनाव के बाद यह घोषणा की और स्पष्ट किया कि वे किसी अन्य दल में शामिल नहीं होंगे। यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान समाप्त होते ही और नतीजों की तारीख (14 नवंबर) करीब आते ही, कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरा शकील अहमद ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने अपने इस बड़े फ़ैसले की मुख्य वजह स्थानीय लीडरशिप से मतभेद को बताया है।

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'लोकल एडजस्टमेंट' नहीं बन पाया

शकील अहमद ने अपने इस्तीफ़े के बाद मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि उनका यह फ़ैसला पार्टी की नीतियों या सिद्धांतों के विरोध में नहीं है, बल्कि यह केवल स्थानीय स्तर पर तालमेल (एडजस्टमेंट) न बैठ पाने का परिणाम है। शकील अहमद ने कहा, "ये मेरी पार्टी के कुछ लोगों से मतभेद की वजह से हुआ है। लेकिन मैं पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों का शुभचिंतक बना रहूंगा। मैंने सदस्यता से त्यागपत्र दिया है, पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों से मेरा कोई विरोध नहीं है।"

जब उनसे पूछा गया कि उनकी नाराज़गी हाई कमान से है या राज्य स्तर पर है, तो उन्होंने साफ किया, "यह लोकल एडजस्टमेंट की बात है। हाई कमान के ही नियुक्त किए लोग लोकल लेवल पर होते हैं। तो स्वाभाविक है कि पार्टी में एक एडजस्टमेंट नहीं बन पाया, जिसकी वजह से यह हुआ।"

20 दिन पहले ही ले लिया था फ़ैसला

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उन्होंने इस्तीफ़ा देने का मन काफी पहले ही बना लिया था, लेकिन उन्होंने चुनाव के बीच में इसकी घोषणा नहीं की ताकि पार्टी को किसी तरह का नुकसान न हो। उन्होंने कहा, "पार्टी से इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला मैंने 15-20 दिन पहले ही कर लिया था। मगर मैंने घोषणा इसलिए नहीं की थी कि मेरी वजह से पांच-छह लोग क्यों नाराज़ हों। इसलिए दूसरे फेज़ के मतदान के बाद मैंने एलान किया है।"

किसी अन्य पार्टी में नहीं जाएंगे शकील अहमद

शकील अहमद के इस्तीफे को लेकर लग रहे राजनीतिक कयासों को विराम देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी अन्य पार्टी का हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा, "मैं किसी अन्य पार्टी का हिस्सा नहीं बनूंगा और न ही मेरे बच्चे राजनीति में आएंगे और चुनाव लड़ेंगे।" यह बयान बिहार की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर लग रही अटकलों पर विराम लगाता है।

शकील अहमद का इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया है जब एग्जिट पोल के आंकड़े भी महागठबंधन के लिए बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। ऐसे में एक प्रमुख मुस्लिम चेहरे का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए एक गंभीर आंतरिक चुनौती पैदा कर सकता है।