दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टीएस संधू ने अभियोजन निदेशालय के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने मामलों के निपटारे में देरी और कम सजा दर पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) सरदार टीएस संधू ने सोमवार को एक अहम बैठक की। इस बैठक में उन्होंने दिल्ली सरकार (GNCTD) के अभियोजन निदेशालय (Directorate of Prosecution) के कामकाज का जायजा लिया। बैठक में कानून और गृह विभाग के प्रधान सचिव, स्पेशल सीपी (वेलफेयर एंड लीगल), अभियोजन निदेशक और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एलजी ने अदालतों में दोषियों को सजा मिलने की कम दर (कनविक्शन रेट), मुकदमों की धीमी रफ्तार और पेंडिंग केसों के बढ़ते अंबार पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को इन समस्याओं से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए।
उन्होंने साफ कहा कि नया कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 अभियोजन पक्ष को काफी ताकत देता है। इसमें जांच के लिए तय समयसीमा, पर्याप्त स्टाफ और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। एलजी ने अधिकारियों से कहा कि वे इसी के हिसाब से अभियोजन निदेशालय के ढांचे और काम करने के तरीके को अपग्रेड करें। एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक दिल्ली की जिला अदालतों में 3,02,477 ट्रायल केस पेंडिंग थे। इनमें से 2,54,597 मामले मजिस्ट्रेट अदालतों में और 47,880 मामले सेशन कोर्ट में लंबित हैं।
एलजी ने निर्देश दिया कि जिन मामलों में मुमकिन हो, वहां आरोपी की गैरमौजूदगी में भी ट्रायल (trial in absentia) चलाया जाए। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल केस ट्रैकिंग और वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि BNSS के तहत ट्रायल की समयसीमा का सख्ती से पालन हो और देरी पर नजर रखी जाए। बेवजह की तारीखें (adjournments) कम से कम ली जाएं और गवाहों को समय पर अदालत में पेश किया जाए।
एलजी ने जोर देकर कहा कि न्याय में देरी का मतलब न्याय से वंचित करना नहीं होना चाहिए। हर उस देरी और खामी को दूर किया जाना चाहिए, जिससे बचा जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी तालमेल और जवाबदेही के साथ काम करने को कहा ताकि न्याय प्रणाली को और असरदार बनाया जा सके। एलजी ने जांच अधिकारियों (IO) के साथ मिलकर चार्जशीट और सबूतों की बारीकी से जांच करने को कहा। साथ ही सरकारी वकीलों, दिल्ली पुलिस और फॉरेंसिक लैब के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने सरकारी वकीलों को नए आपराधिक कानूनों, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और फॉरेंसिक जांच की ट्रेनिंग देने के भी निर्देश दिए। जवाबदेही तय करते हुए एलजी ने कहा कि जिन मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं, उनका विश्लेषण किया जाए। अभियोजन पक्ष की कमियों को पहचान कर उन्हें सुधारा जाए।
बैठक में बताया गया कि आपराधिक मामलों में बरी होने के आदेशों की जांच के लिए एक स्थायी समिति बनी हुई है। यह समिति जांच और अभियोजन की गलतियों का पता लगाती है। अगस्त 2014 से अब तक इस समिति की 34 बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें 64,210 मामलों पर विचार किया गया है। रिलीज के अनुसार, एलजी ने पीड़ितों के साथ सही संवाद रखने और महिलाओं व बच्चों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने को भी कहा।
निदेशालय में कर्मचारियों की नियुक्ति में देरी और कोर्ट रूम की कमी के मुद्दे पर एलजी ने भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को UPSC और PWD के सामने उठाएंगे ताकि इसे जल्द से जल्द सुलझाया जा सके। समीक्षा बैठक में कुछ अहम बातें सामने आईं। जिला अदालतों में सरकारी वकीलों पर काम का भारी बोझ है। बताया गया कि सेशन कोर्ट में तैनात 155 पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (PP) और एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) औसतन 309 पेंडिंग केस संभाल रहे हैं। रोहिणी कोर्ट में तो यह आंकड़ा 627 तक पहुंच गया है।
रिलीज में आगे बताया गया कि मजिस्ट्रेट अदालतों में तैनात 126 एडिशनल और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर औसतन 2,021 पेंडिंग केस देख रहे हैं। रोहिणी में यह संख्या 3,065 तक है। संसाधनों की बात करें तो पीपी, एपीपी और असिस्टेंट पीपी के 507 मंजूर पदों में से 216 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा सपोर्टिंग स्टाफ के 71 में से 42 पद भी खाली हैं।
UPSC ने असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के 140 पदों के लिए विज्ञापन निकाला है। वहीं, निदेशालय ने कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर 50 पदों के लिए विज्ञापन दिया है। इसके अलावा 32 एपीपी के पद डेपुटेशन पर भरे जाने हैं। BNSS के तहत बनाए गए डिप्टी डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर के 40 नए पदों के लिए भर्ती नियम अभी जमा किए गए हैं। निदेशालय ने कोर्ट रूम, सरकारी वकीलों के चैंबर और रिकॉर्ड रूम की कमी का मुद्दा भी उठाया।








