दिल्ली में गणेश विसर्जन के लिए 81 कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। खंडित मूर्तियों और पूजा सामग्री के लिए 250+ ‘विसर्जन पात्र’ भी लगाए जा रहे हैं।
दिल्ली में गणेश उत्सव के दौरान आस्था और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि गणपति विसर्जन के लिए राजधानी में 81 कृत्रिम तालाब तैयार किए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ गणपति विसर्जन कर सकें और नदियों को भी सुरक्षित रखा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में आस्था और नदियों की सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है। इसी सोच के तहत सरकार ने गणेश उत्सव के दौरान प्राकृतिक जलस्रोतों पर दबाव कम करने के लिए कृत्रिम विसर्जन स्थलों की व्यवस्था की है।
दिल्ली में मूर्ति विसर्जन को लेकर पर्यावरणीय दिशा-निर्देश पहले से लागू हैं। दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग की संशोधित गाइडलाइंस में भी कृत्रिम और निर्धारित जलाशयों में विसर्जन, प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के इस्तेमाल तथा पूजा के बाद निकलने वाले ठोस कचरे के सुरक्षित निपटारे पर जोर दिया गया है।
Ganesh Visarjan 2026: दिल्ली में बनाए गए 81 कृत्रिम तालाब
गणेश उत्सव के दौरान सबसे बड़ी चिंता मूर्ति विसर्जन के बाद जलस्रोतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने इस बार शहर में 81 artificial ponds यानी कृत्रिम तालाब बनाए हैं। इन तालाबों में गणपति विसर्जन किया जा सकेगा। इससे श्रद्धालुओं को निर्धारित स्थान मिलेंगे और नदियों में सीधे मूर्ति विसर्जन की जरूरत कम होगी।
दिल्ली सरकार के उपलब्ध पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों में भी मूर्ति विसर्जन के लिए अस्थायी कृत्रिम तालाब या निर्धारित टैंकों की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है। साथ ही मूर्तियों में प्राकृतिक और बायोडिग्रेडेबल सामग्री तथा प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया गया है।
दिल्ली के मौजूदा पर्यावरणीय प्रावधानों के तहत यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक और पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों के इस्तेमाल की व्यवस्था भी की गई है। दिल्ली के 2026 के Economic Survey में DPCC के 26 अगस्त 2025 के निर्देशों का उल्लेख किया गया है।
Khandit Murti और पूजा सामग्री के लिए 250+ ‘Visarjan Patra’
सरकार की पहल सिर्फ गणपति विसर्जन तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, खंडित मूर्तियों, पवित्र पूजा सामग्री, देवी-देवताओं के वस्त्र और तस्वीरों के सम्मानजनक निपटारे के लिए दिल्ली में 250 से ज्यादा विशेष ‘विसर्जन पात्र’ लगाए जा रहे हैं। इन पात्रों को लोगों की सुविधा के हिसाब से अलग-अलग जगहों पर रखा जाएगा। इनमें मंदिरों, स्कूलों और दूसरे सुविधाजनक स्थानों के आसपास की जगहें शामिल हैं। इस व्यवस्था का मकसद साफ है- ऐसी धार्मिक सामग्री को लोग इधर-उधर या कूड़े के साथ न फेंकें। श्रद्धा से इस्तेमाल की गई इन वस्तुओं को भी उसी सम्मान के साथ संग्रहित किया जाए।
पूजा सामग्री का Recycling और Upcycling करेगी दिल्ली सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्लीवासी इन ‘विसर्जन पात्रों’ में खंडित मूर्तियां और अन्य पवित्र सामग्री श्रद्धा एवं सम्मान के साथ रख सकते हैं। इसके बाद इन सामग्रियों के recycling और upcycling की जिम्मेदारी सरकार की होगी। यानी व्यवस्था केवल संग्रह करने तक नहीं रुकेगी। धार्मिक सामग्री को अलग तरीके से संभालने और उसका उचित निपटारा करने की कोशिश की जाएगी।
यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि बड़े धार्मिक आयोजनों के बाद फूल, कपड़े, तस्वीरें, मूर्तियां और अन्य पूजा सामग्री बड़ी मात्रा में निकलती है। यदि इन्हें सामान्य कचरे के साथ मिला दिया जाए तो इनके निपटारे में अलग तरह की समस्या पैदा होती है।
दिल्ली में Ganesh Visarjan की लोकेशन कैसे देखें?
सरकार की ओर से श्रद्धालुओं को विसर्जन स्थलों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। खंडित मूर्ति संग्रह केंद्रों यानी Visarjan Patra की लोकेशन देखने के लिए दिल्ली सरकार की पहल से जुड़ी वेबसाइट पर जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
Khandit Murti Collection Locations: https://delhiinitiatives.com/Puja-Material.html
वहीं, 81 कृत्रिम तालाबों की लोकेशन देखने के लिए दिल्ली इनिशिएटिव्स के डायरेक्टरी पेज पर जानकारी देखी जा सकती है।
Artificial Pond Locations: https://www.delhiinitiatives.com/#directory
यमुना को बचाने पर क्यों है जोर?
दिल्ली में मूर्ति विसर्जन और जल प्रदूषण का मुद्दा नया नहीं है। पर्यावरण विभाग की संशोधित मूर्ति विसर्जन गाइडलाइंस में जलस्रोतों की गुणवत्ता प्रभावित न हो, इसके लिए निर्धारित स्थानों और कृत्रिम तालाबों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। गाइडलाइंस में प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक और थर्मोकोल जैसी गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनी मूर्तियों के बजाय प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है।
दिल्ली के 2026 Economic Survey में भी यमुना के फ्लडप्लेन की सुरक्षा, अवैध डंपिंग रोकने, निर्माण एवं विध्वंस कचरे को हटाने और यमुना फ्लडप्लेन के पुनरुद्धार जैसे कदमों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में गणेश विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब और धार्मिक सामग्री के लिए अलग ‘विसर्जन पात्र’ बनाने की पहल को इसी व्यापक पर्यावरणीय व्यवस्था के हिस्से के तौर पर देखा जा सकता है।


