Shibu Soren Net Worth : कितनी संपत्ति छोड़ गए झारखंड के गुरुजी?
Shibu Soren Net Worth: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और JMM संस्थापक शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास करीब 7.25 करोड़ की संपत्ति थी और 2.2 करोड़ की देनदारी। जानिए पूरी डिटेल इस रिपोर्ट में।

‘गुरुजी’ नहीं रहे, झारखंड की राजनीति में गूंज उठा सन्नाटा
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और JMM के संस्थापक शिबू सोरेन का 81 वर्ष की आयु में दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। 'गुरुजी' के नाम से प्रसिद्ध इस आदिवासी नेता के निधन से राज्य की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। उनकी सादगी, संघर्ष और आदिवासी हितों के लिए समर्पण ने उन्हें झारखंड की आत्मा बना दिया था।
अपने पीछे कितनी दौलत छोड़ गए 'गुरुजी'?
शिबू सोरेन की संपत्ति को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं, लेकिन उनके 2019 के चुनावी हलफनामे ने सच्चाई सामने रखी। दस्तावेजों के अनुसार, उस वक्त उनकी कुल संपत्ति ₹7.25 करोड़ रुपये से अधिक थी। इनमें चल और अचल दोनों संपत्तियाँ शामिल थीं। लेकिन इसके साथ ही उनके ऊपर ₹2.2 करोड़ से ज्यादा की देनदारी भी थी, जो बताती है कि उन्होंने कोई बेशुमार दौलत नहीं जोड़ी थी।
सालाना कमाई इतनी साधारण, जितनी एक आम नागरिक की?
शिबू सोरेन की आय भी उतनी ही सरल और पारदर्शी रही, जितनी उनके जीवनशैली में झलकती थी। 2017-18 के इनकम टैक्स रिटर्न में उन्होंने कुल ₹7,05,090 की आय दर्ज की थी। वहीं 2016-17 में ₹6,76,412 और 2015-16 में ₹6,51,724 की आमदनी बताई थी। इन आंकड़ों से साफ होता है कि उन्होंने सादा जीवन, उच्च विचार के सिद्धांत को सच में जिया।
करोड़ों की संपत्ति, लेकिन करोड़ों का कर्ज भी
हलफनामे में दर्ज आंकड़े ये भी बताते हैं कि शिबू सोरेन की वित्तीय स्थिति उतनी सरल नहीं थी जितनी प्रतीत होती थी। कुल ₹7.25 करोड़ की संपत्ति के मुकाबले ₹2.2 करोड़ की देनदारी भी उनके नाम दर्ज थी। इसका अर्थ है कि वे आर्थिक रूप से हमेशा संतुलन में रहे, कोई भी भारी विलासिता या गुप्त निवेश उनके नाम नहीं था।
अब कौन संभालेगा झारखंड में ‘गुरुजी’ की विरासत?
शिबू सोरेन के निधन के साथ ही झारखंड की राजनीति में एक खाली स्थान बन गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके बाद JMM की राजनीतिक विरासत कौन संभालेगा? हेमंत सोरेन उनके बेटे हैं और खुद राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, लेकिन जनता के मन में 'गुरुजी' जैसी पकड़ बनाना इतना आसान नहीं होगा। ये विरासत अब एक परीक्षा की घड़ी लेकर आई है।
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