भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत सीबीआई ने मध्य प्रदेश से जांच के अधिकार की इजाजत मांगी है। राज्य सरकार ने इस मांग को मानकर अधिसूचना जारी कर दिया है। 

भोपाल। देशभर में "दण्ड प्रक्रिया संहिता" की जगह "भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता" लागू हो गई है। इस बदलाव का असर केंद्रीय एजेंसियों पर भी पड़ा है। सीबीआई के पास राज्यों में जाकर जांच के अधिकार हैं। अगर मामला राज्य सरकार के अधिकारी के खिलाफ हो तो सीबीआई को राज्य सरकार से इजाजत लेनी होती है।

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"भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता" लागू होने के बाद सीबीआई द्वारा राज्यों से जांच के लिए आने देने की इजाजत मांगी गई है। इसी क्रम में केंद्रीय एजेंसी ने 19 जून को 2024 को मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखा था। एजेंसी ने इसके साथ ही अधीसूचना का प्रारूप भी भेजा था ताकि राज्य सरकार को जारी करने में आसानी हो।

मध्य प्रदेश सरकार ने जांच के लिए सीबीआई अधिकारियों के आने को दी सहमति

अपने पत्र में सीबीआई डायरेक्टर ने मध्य प्रदेश सरकार से राज्य में सीबीआई द्वारा जांच किए जाने पर सहमति मांगी थी। राज्य सरकार ने सीबीआई की मांग को मानकर सहमति दे दी है। इसके लिए 16 जुलाई को अधिसूचना जारी की गई। नई अधिसूचना में मध्य प्रदेश सरकार ने सीबीआई के अधिकार को न तो कम किया और न ही बढ़ाया है। सीबीआई के अधिकारी पहले की तरह अब भी राज्य में मामलों की जांच कर सकेंगे। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार होने से सीबीआई के लिए पहले भी परेशानी नहीं थी। 

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मामला सरकारी अधिकारी का हो तो लेनी होगी अनुमति

बता दें कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 17 (अ) के उपखण्ड (ख) के अनुसार सीबीआई राज्य सरकार के किसी भी अधिकारी के खिलाफ जांच या पूछताछ सरकार की अनुमति के बिना नहीं करेगी। यह प्रावधान अब भी लागू है। सीबीआई राज्य सरकार के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ बिना राज्य सरकार से पहले अनुमित लिए जांच नहीं करेगी। इसी प्रकार की अधिसूचना गोवा, उड़ीसा, मिजोरम समेत कई अन्य राज्यों ने भी जारी की है।

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