आपने लोगों को यह कहते सुना होगा कि ''मियां-बीबी राजी तो क्या करेगा काजी।'' यह कहावत आम लोगों के बीच काफी प्रचलित है। पर छतरपुर में काजी ने ही अचरज में डाल दिया। मियां-बीवी शादी के लिए राजी थे। पर काजी निकाह पढने को तैयार नहीं थे।

छतरपुर। आपने लोगों को यह कहते सुना होगा कि ''मियां-बीबी राजी तो क्या करेगा काजी।'' यह कहावत आम लोगों के बीच काफी प्रचलित है। पर छतरपुर में काजी ने ही अचरज में डाल दिया। मियां-बीवी शादी के लिए राजी थे। पर काजी डीजे के साथ बारात निकालने को लेकर खफा थे। वह निकाह पढने को तैयार ही नहीं हो रहे थे। उन्होंने दुल्हे को खूब खरी खोटी सुनाई। सबके सामने दुल्हे ने माफी मांगी। तब जाकर काजी निकाह पढने को तैयार हुए। इस वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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दो साल पहले बैठक में हुआ था तय

स्थानीय लोगों के अनुसार, छतरपुर के नौगांव इलाके में मुस्लिम समाज ने दो साल पहले तय किया था कि शादी-ब्याह में फिजूलखर्ची पर रोक लगायी जाएगी। डीजे के साथ बारात निकालना भी उस रोक में शामिल था। पर एक शादी में ऐसा नहीं हुआ। दुल्हा डीजे के साथ बारात लेकर पहुंचा। लड़का पक्ष तब असहज स्थिति में आ गया। जब दुल्हा स्टेज पर पहुंचा था और काजी मुनव्वर रजा ने निकाह पढाने से इंकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि बिरादरी की बैठक में यह पहले ही तय हुआ था कि शादियों में फिजूलखर्ची पर रोक लगायी जाएगी। आप उसका उल्लंघन कर रहे हैं। इसलिए निकाह नहीं पढ सकते।

चार घंटे तक चला मान-मनौव्वल का दौर

फिर मान-मनौव्वल का दौरा लगभग चार घंटे तक चला। आखिरकार काजी निकाह पढाने को तैयार हुए। पर उन्होंने स्टेज पर बैठे दुल्हे को पहले खरी खोटी सुनायी और सबके सामने माफी मांगने को कहा। दुल्हे ने स्टेज पर से ही मौजूद लोगों से माफी मांगी और कहा कि ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। तब जाकर काजी निकाह पढाने को तैयार हुए।

ये है मान्यता

आपको बता दें कि डीजे से ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ जाता है और इसकी वजह से शादियों में फिजूलखर्ची भी बढती है। उस पर नियंत्रण के लिए नौगांव इलाके में मुस्लिम समाज के लोगों ने बैठक में यह फैसला लिया था। वैसे मुस्लिम धर्म गुरुओं के मुताबिक शादी में नाचना-गाना व डीजे वगैरह धर्म के अनुसार उचित नहीं है। इससे आम लोगों को दिक्कते होती हैं।