छत्तीसगढ़ की महिला का दर्दनाक खुलासा—जिस चाचा ने जन्म से पाला, उसने ही बेचा डेढ़ लाख में। पति बना सौदागर, हर रात नए मर्द लाता और बनाता रहा तवायफ। जानें कैसे शुरू हुआ ये शर्मनाक सौदा और कहां तक फैली इसकी परछाई…

Tikamgarh Crime News:  इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक चौंकाने वाली घटना मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से सामने आई है, जिसमें छत्तीसगढ़ की रहने वाली एक महिला ने अपने ही चाचा और पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि उसके चाचा ने उसे शादी के नाम पर एक अनजान व्यक्ति को मात्र 1.5 लाख रुपये में बेच दिया, जिसने शादी के बाद उसे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया।

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जिस चाचा ने पाला पोषा, उसी ने डेढ़ लाख में किया सौदा 

पीड़िता का आरोप है कि उसके रिश्तेदार चाचा रामजनक ने उसे विजय घोष नामक व्यक्ति के हाथों बेच दिया, जिसने आगे जाकर उसकी शादी राजेश घोष नामक व्यक्ति से करवा दी। पीड़िता बताती है कि उसे कहा गया कि यह शादी है, लेकिन असल में ये एक सौदा था। शादी के कुछ समय तक सब कुछ सामान्य चला, लेकिन फिर उसकी ज़िंदगी अंधेरे में डूबने लगी।

शादी के बाद शुरू हुआ सौदे का दौर

महिला ने बताया कि उसके कथित पति राजेश घोष ने शादी के बाद उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और उसे जबरन वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया। उसने दावा किया कि पहले गांव में फिर इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में उसे जबरन भेजा गया, जहां वह रोजाना नए-नए मर्दों के साथ सोने के लिए मजबूर की जाती थी। वह कहती है, “हर दिन मैं बिखरती रही और वह आदमी मेरी आत्मा को बेचता रहा।”

पैसा छीनता था, मारपीट करता था 

पीड़िता ने बताया कि वह जब भी किसी ग्राहक से पैसे लाती, तो उसका पति सारा पैसा छीन लेता था और मना करने पर बेरहमी से पीटता था। महिला का कहना है कि उसने कई बार थाने के चक्कर काटे लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया।

थाने पहुंची, तो लिखी गई सिर्फ मारपीट की FIR 

जब हालात हद से ज़्यादा बिगड़ गए, तो महिला बुधवार को टीकमगढ़ थाने में जाकर ज़िद पर अड़ गई और पुलिस को सच्चाई बताई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ सिर्फ मारपीट की धाराओं में मामूली एफआईआर दर्ज की, जबकि महिला लगातार वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर करने और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगा रही थी।

पुलिस का जवाब: जांच चल रही

थाना प्रभारी उपेंद्र छारी ने कहा, “हमने महिला की शिकायत पर पति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” हालांकि, इस मामले में आरोपी चाचा और अन्य दलालों की भूमिका को लेकर अभी कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।

क्या सिर्फ एक एफआईआर काफी है? 

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक महिला को अपने ही परिवार के लोगों से धोखा मिले, तो वह न्याय के लिए कहां जाए? क्या सिर्फ मारपीट की धाराएं इस अमानवीय कृत्य के लिए पर्याप्त हैं? समाज और सिस्टम को अब इस तरह के मामलों में और संवेदनशील और सक्रिय होने की ज़रूरत है।