महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार और आईपीएस अंजना कृष्णा के बीच अवैध खनन को लेकर हुई बहस का वीडियो वायरल है। आखिर कौन है ये लेडी अफसर, जिसने पवार की पहचान तक मानने से इंकार कर दिया? क्या थी वजह, जानिए ऐसे तमाम सवालों के जवाब और देखें वीडियो…

सोलापुर। महाराष्ट्र की राजनीति इस समय एक वायरल वीडियो को लेकर गर्माई हुई है। यह वीडियो सोलापुर जिले का है, जहाँ राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और हाल ही में तैनात हुई महिला आईपीएस अधिकारी अंजना कृष्णा के बीच अवैध मिट्टी उत्खनन पर बहस हो गई। वीडियो वायरल होते ही सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे—क्या सचमुच डिप्टी सीएम ने लेडी अफसर पर दबाव बनाने की कोशिश की, या फिर मामला कुछ और था?

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कौन हैं आईपीएस अंजना कृष्णा?

अंजना कृष्णा 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में सोलापुर जिले के करमाला में डीएसपी के पद पर तैनात हैं। केरल की रहने वाली अंजना ने यूपीएससी परीक्षा 2022 में AIR-355 रैंक हासिल की थी। साधारण परिवार से आने वाली अंजना की ईमानदारी और कड़े फैसलों के लिए पहचान बनाई जा रही है।

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सोलापुर में किस मुद्दे पर भिड़े अजित पवार और महिला अफसर?

31 अगस्त को सोलापुर के कुर्डु गाँव में सड़क निर्माण के नाम पर मुरुम मिट्टी के अवैध उत्खनन की शिकायत मिली थी। मौके पर पहुँचकर अंजना कृष्णा ने कार्रवाई शुरू की। तभी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) कार्यकर्ता ने सीधे डिप्टी सीएम अजित पवार को फोन लगाया और उनका मोबाइल अंजना को थमा दिया।

IPS ने अजित पवार को क्यों नहीं पहचाना?

फोन पर खुद को "मैं उपमुख्यमंत्री बोल रहा हूँ" कहने वाले अजित पवार की आवाज अंजना कृष्णा ने नहीं पहचानी और उनसे कहा कि वे सीधे उनके नंबर पर कॉल करें। इस जवाब से पवार भड़क गए और बोले-“इतनी हिम्मत है तुम्हारी? मैं तुम्हारे खिलाफ एक्शन लूँगा।” इसके बाद पवार ने उन्हें वीडियो कॉल किया और कार्रवाई रोकने को कहा।

क्या सचमुच कार्रवाई रोकने का दबाव था?

NCP सांसद सुनील तटकरे का कहना है कि अजित पवार का इरादा कार्रवाई रोकने का नहीं था, बल्कि शायद पार्टी कार्यकर्ताओं को शांत करना था। लेकिन वीडियो के लीक होने से अब मामला विवादों में घिर गया है।

सियासी गलियारों में क्यों मचा बवाल?

ग्राम पंचायत की अनुमति का हवाला दिया गया, लेकिन कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका। ऐसे में IPS अंजना कृष्णा की कार्रवाई सही मानी जा रही है। दूसरी ओर, डिप्टी सीएम का गुस्से भरा अंदाज कई सवाल खड़े कर रहा है-

  • क्या सत्ता के दबाव में प्रशासनिक फैसले रुक सकते हैं?
  • क्या महिला अफसर की सख्ती पवार को नागवार गुज़री?
  • या फिर यह सिर्फ राजनीतिक नाटक था?