बॉम्बे हाईकोर्ट ने सास के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी को कड़ी फटकार लगाई है। निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने कहा, यह शर्मनाक कृत्य है, पीड़िता आरोपी के लिए माँ जैसी है।

अपनी सास के साथ यौन उत्पीड़न करने के मामले में आरोपी के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने मंगलवार को आरोपी के खिलाफ निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। 

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जस्टिस जी ए सनप की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने कहा कि यह शर्मनाक कृत्य है और पीड़ित महिला आरोपी के लिए माँ जैसी है। दिसंबर 2018 में 55 वर्षीय सास के साथ बलात्कार के मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी को 14 साल की कैद की सजा सुनाई थी। यह फैसला 2022 में आया था। आरोपी ने सत्र न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। 

शिकायतकर्ता का कहना है कि उसकी बेटी और दामाद अलग रह रहे थे। बेटी के दो बच्चे आरोपी के साथ रहते थे। आरोपी अपनी सास से लगातार कहता था कि वह उसकी बेटी के साथ संबंध सुधारने में मदद करे। इसी पर वह आरोपी के घर गई थी। वहाँ आरोपी ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद उसने अपनी बेटी को इस बारे में बताया। बेटी ने ही उसे शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई। 

हालांकि, आरोपी ने इस बात से इनकार किया और यह साबित करने की कोशिश की कि यह संबंध सहमति से था। लेकिन, अदालत ने इसकी कड़ी निंदा की। अदालत ने कहा कि पीड़िता 55 साल की है। वह आरोपी की माँ की उम्र की महिला है। आरोपी को उसे माँ की तरह देखना चाहिए था। अदालत ने कहा कि अगर यह संबंध सहमति से होता तो वह अपनी बेटी को इसके बारे में कभी नहीं बताती और पुलिस में भी शिकायत नहीं करती। 

अदालत ने कहा कि आरोपी ने महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाई है। शिकायतकर्ता ने सपने में भी ऐसा नहीं सोचा होगा। आरोपी ने बेहद शर्मनाक कृत्य किया है।