उनको उम्मीद थी कि मंडी में वाजिब दाम मिलेगा जिससे उनकी लागत तो निकल ही जाएगी, मुनाफा भी कमा लेंगे।

Farmers Onion purchased for 1 rupee per Kg: सब्जियों या खाने-पीने की चीजें चाहें जितनी भी महंगी हो लेकिन किसान के हिस्से में मजबूरियां और तंगी ही है। उसकी लागत भी फसल उगाने में डूब जा रही है, ऊपर से उसका श्रम भी जाया हो रहा। शुक्रवार को इसकी बानगी सोलापुर में दिखी। चालीस हजार रुपये लगाकर जिस फसल को तैयार कर किसान मार्केट में बेचने के लिए ले गया, किराया-भाड़ा काटकर व्यापारी ने महज दो रुपये थमा दिए। 512 किलो प्याज लेकर 70 किलोमीटर दूर बेचने आया किसान Rs 2 (दो रुपये) का चेक लेकर समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। मजबूर किसान की स्थिति देखकर जब कुछ लोगों ने व्यापारी से इतनी कम कीमत देने पर सवाल किया तो उसने कह दिया कि प्याज खराब थे इसलिए एक रुपये किलो रेट लगाया।

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किसान की खुशियां चेक देखकर ही काफूर...

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के किसान राजेंद्र की तो चेक देखकर सारी उम्मीदें काफूर हो चुकी हैं। सोलापुर जिले के बरशी तालुका के बोरगांव में रहने वाले 58 साल के राजेंद्र तुकाराम चव्हाण प्याज की खेती किए थे। बीते 17 फरवरी को वह खेतों में बोए गए फसल की अच्छी उम्मीद पाले बाजार में बेचने पहुंचे। किसान राजेंद्र तुकाराम बताते हैं कि वह खेत से 512 किलो प्याज लेकर सोलापुर मंडी पहुंचे। यह मंडी किसान के घर से करीब 70 किलोमीटर दूर है। उनको उम्मीद थी कि मंडी में वाजिब दाम मिलेगा जिससे उनकी लागत तो निकल ही जाएगी, मुनाफा भी कमा लेंगे।

बाजार पहुंचे तो प्याज की क्वालिटी को खराब बताकर परेशान किया गया

किसान राजेंद्र तुकाराम बताते हैं कि पहले वह एपीएमसी पहुंचे। यहां अपने फसल को बेचने की कोशिश की लेकिन प्याज लेने से इनकार कर दिया गया। बताया कि प्याज की क्वालिटी खराब है। अब राजेंद्र तुकाराम परेशान हो गए। बाहर उनको एक दूसरा व्यापारी मिला। उसने उनकी फसल लेने की पेशकश की। यहां उस व्यापारी ने 512 किलो प्याज की कीमत 512 रुपये लगाया। हद तो यह कि 509.50 रुपये बाजार तक फसल पहुंचाने का किराया और लोडिंग-अनलोडिंग चार्ज काटने के बाद 2.49 रुपए बचे। व्यापारी ने किसान राजेंद्र को 2 रुपये का चेक थमा दिया। दो रुपये का चेक देख किसान चक्कर खा गए। किसी तरह लोगों ने उनको संभाला।

चालीस हजार रुपये लगाकर तैयार की थी फसल, मिला दो रुपये...

राजेंद्र तुकाराम बताते हैं कि उन्होंने फसल को चालीस हजार रुपये लागत लगाकर तैयार की थी। बीते साल उन्होंने 20 रुपये किलो के भाव प्याज को बेचे थे। इस साल उन्होंने बीज महंगे कीमत पर खरीदे थे। कीटनाशक व खाद की कीमतें भी वह बताते हैं कि काफी बढ़ी हैं। इस बार 500 किलो प्याज उगाने में 40 हजार रुपये लागत आई लेकिन दो रुपये उसे बेचने से मिला। उनकी लागत तो डूबी ही है, पूरी मेहनत भी बेकार चली गई।

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