विकलांगता और ओबीसी कोटे में आरक्षण का दुरुपयोग कर आईएएस का पद पाने वाली पूजा खेडकर की ट्रेनिंग रोक दी गई है। उन्हें ट्रेनिंग के लिए अकोला जाना था। इसी के साथ अब पुलिस उस डॉक्टर से भी पूछताछ करेगी। जिसने उन्हें विकलांगता का सार्टिफिकेट दिया था।

पुणे. महाराष्ट्र के पुणे की आईएएस अफसर पूजा खेडकर पर आखिकरकार गाज गिर गई है। उत्तराखंड के मसूरी में मौजूद लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी (LBSNAA) ने लेटर भेजकर अकोला महाराष्ट्र में होने वाली उनकी ट्रेनिंग को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। एकडमी ने कहा-आप सारा काम छोड़कर 23 जुलाई तक एकडमी पहुंचें। आपके जिला ट्रेनिंग प्रोग्राम को रद्द किया जाता है। बता दें, इससे पहले पूजा को 15 जुलाई से 19 जुलाई तक आदिवासी विकास परियोजना के तहत होने वाले ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होना था। पूजा खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने दृष्टिबाधित और मानसिक बीमारी का सर्टिफिकेट लगाकर UPSC परीक्षा में भाग लिया था। इन्हीं डॉक्यूमेंट की वजह से उन्हें खास तवज्जो मिली और वो IAS बन सकीं। 

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डॉक्टर पर गिरेगी गाज

पूजा खेडकर मामले में अब पुलिस उस डॉक्टर ने भी पूछताछ करेगी। जिसने उन्हें विकलांगता का सर्टिफिकेट दिया है। उन्होंने विकलांगता सर्टिफिकेट के लिए दो बार अप्लाई किया था। पहली बार उनका आवेदन खारिज हो गया था। इसके बाद उन्होंने दोबारा आवेदन किया। उन्होंने लोकोमीटर विकलांगता जो कि हडिड्यों और मांसपेशियों को प्रभावित करती है। उसके लिए आवेदन किया था। जिसके खारिज होने के बाद उन्होंने पिंपरी चिंचवड के एक सरकारी अस्पताल में दोबारा आवेदन किया। जिसे स्वीकार कर लिया गया। अब उस डॉक्टर से भी पूछताछ होगी, जिसने विकलांगता का सर्टिफिकेट दिया था।

ओबीसी सर्टिफिकेट की होगी जांच

पूजा द्वारा ओबीसी सर्टिफिकेट का उपयोग भी आईएएस बनने के लिए किया गया। इस सर्टिफिकेट की भी जांच होगी। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग को ​दी जानकारी में बताया था कि वे मानसिक रूप से अक्षम होने के साथ ही ओबीसी केटेगिरी में आती है। उन्हें आंखों से देखने में दिक्कत होती है। बताया जा रहा है कि पूजा ने मेडिकल टेस्ट करवाने से भी मना कर दिया था।

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मानसिक और दृष्टि बाधित विकलांगता के सर्टिफिकेट

ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर केस में एक के बाद एक कई मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए मानसिक और दृष्टि संबंधी विकलांगता के सर्टिफिकेट बनवाए थे। इसके अलावा उन्होंने पुणे के ​एक अस्पताल से तीसरा विकलांगता सर्टिफिकेट भी हासिल करने की कोशिश की थी। लेकिन उनका आवेदन कैंसिल कर दिया गया था।

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