पुणे में 83 वर्षीय बुजुर्ग से डिजिटल धोखाधड़ी हुई। ठगों ने पुलिस अफसर बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 1.2 करोड़ रुपये ठग लिए। इस सदमे के कारण एक महीने बाद उनकी दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई।

मुंबई: पुणे में एक 83 साल के बुजुर्ग की डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार होने के एक महीने बाद मौत हो गई। रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी साइबर फ्रॉड का शिकार हुए थे। इस घटना के बाद वह मानसिक रूप से टूट गए थे। ऑनलाइन ठगों ने उनसे करीब 1.2 करोड़ रुपये ठग लिए थे। पति की मौत के एक हफ्ते बाद जब पत्नी ने शिकायत दर्ज कराई, तब जाकर यह मामला सामने आया। बुजुर्ग दंपति के बच्चे विदेश में रहते हैं। इस सब की शुरुआत अगस्त में हुई, जब एक शख्स ने कोलाबा पुलिस स्टेशन का अफसर बताकर बुजुर्ग को फोन किया। फोन करने वाले ने कहा कि वह एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट है और मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बुजुर्ग का नाम भी शामिल है। उसने यह भी कहा कि एक प्राइवेट एयरलाइन कंपनी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बुजुर्ग के बैंक खाते और आधार की जानकारी का गलत इस्तेमाल हुआ है।

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लेकिन बुजुर्ग ने इन आरोपों से इनकार कर दिया। इसके बाद, दो और लोगों ने एक दूसरे वीडियो कॉल पर उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। एक ने खुद को IPS अफसर विजय खन्ना और दूसरे ने CBI अफसर दया नायक बताया। दोनों ने दंपति को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिर, घंटों तक वीडियो कॉल पर रखकर उन्हें बताया गया कि वे 'डिजिटल अरेस्ट' में हैं। बैंक खातों की जांच के बहाने, ठगों ने 16 अगस्त से 17 सितंबर के बीच उनसे अलग-अलग खातों में कुल 1.19 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए। उन्हें बताया गया कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा।

साइबर पुलिस का कहना है कि जब उन्हें इस घटना के बारे में पता चला, तो अधिकारियों ने दंपति को FIR दर्ज करने की सलाह दी थी। लेकिन उन्होंने कहा कि वे अपनी बेटी के विदेश से आने के बाद शिकायत दर्ज कराएंगे। पर कुछ ही दिनों बाद, बुजुर्ग की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। पत्नी ने जांच अधिकारियों को बताया कि अपनी सारी जमापूंजी खोने और ठगों के लगातार उत्पीड़न के कारण उनके पति बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव में थे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि बुजुर्ग की मौत और धोखाधड़ी के बीच सीधा संबंध नहीं जोड़ा जा सकता। वैसे, साइबर धोखाधड़ी की जांच अभी भी जारी है।