राजस्थान में लूट और ठगी की वारदात लगातार बढ़ती जा रही है। अपराधी घरों बैंक एटीएम में लूट की वारदात तो करते ही थे। अब वे धार्मिक स्थलों को भी लूटने लगे है। ऐसा ही एक मामला उदयपुर शहर से सामने आया जहां 700 साल पुराने मंदिर में 123 करोड़ की लूट की।

उदयपुर (udaipur News). राजस्थान में अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है। अपराधी ठगी और पैसे लूटने के लिए नए-नए तरीके ढूंढते जा रहे हैं। जो अब मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थानों को भी नहीं छोड़ रहे हैं ऐसा ही एक मामला सामने आया है। राजस्थान के उदयपुर जिले से जहां के एक प्रसिद्ध 700 साल पुराने मंदिर में 123 करोड रुपए का गबन हो गया। जब मामला कोर्ट में पहुंचा तो अब कोर्ट ने हाई लेवल एजेंसी से इसकी जांच कराने के आदेश दिए हैं।

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उदयपुर के प्रसिद्ध शिशोदा भैरू जी मंदिर में की ठगी

मामला राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित ग्राम शिशोदा में शिशोदा भेरुजी क्षेत्रपाल मंदिर का है। जहां लाखों की संख्या में भक्त आते हैं। यहां आने वाले भक्त करोड़ों रुपए का चढ़ावा भी चढ़ाते हैं। मामले में 123 करोड़ रुपए के गबन का आरोप मंदिर के पुजारी और मुनीम सहित कुल 4 लोगों पर लगा है। भगवान सिंह नाम के परिवादी ने पुजारी विजयसिंह, मुनीम रूप सिंह, अंबालाल और गणेश लाल पर आरोप लगाए हैं। एफआईआर में उन्होंने कहा है कि मंदिर में इस तरह का गबन लाखों श्रद्धालु की भावना को ठेस पहुंचाता है। परिवादी का आरोप है कि जब पुलिस ने मामले में कार्रवाई नहीं की तो उन्हें कोर्ट का रुख करना पड़ा।

उदयपुर का शिशोदा मंदिर है 700 साल पुराना

आपको बता दें कि राजस्थान का यह मंदिर करीब 700 साल पुराना है। जहां हर रविवार को विशाल मेला भरता है जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं। इसके अलावा यहां हर साल 4 बड़े जागरण होते हैं। यह सब पिछले करीब 3 दशक से चला आ रहा है। इस मंदिर को पिछले कई सालों से नामजद आरोपियों ने अपने अधीन ले रखा है। परिवादी ने f.i.r. में बताया है कि देवस्थान विभाग और सरकार द्वारा इस मंदिर की व्यवस्था संभाली गई तब से इस मंदिर की हर महीने की आय करीब 30 लाख से अधिक है। फिलहाल अब पुलिस जांच के बाद ही पूरी स्थिति क्लियर हो पाएगी।

आपको बता दें कि राजस्थान में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है जब मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पर रुपए के गबन का आरोप लगा हो उसके पहले राजस्थान के अन्य भी कई मंदिरों में ऐसे ही मामले सामने आ चुके हैं। जिसका कारण है कि एक ही परिवार के लोगों के द्वारा मंदिर संभाला जाता है। ऐसे में दूसरा पक्ष हमेशा उन पर आरोप लगाता है।