Churu Moharram Murder Mystery: 17 वर्षीय शाहरुख मोहर्रम जुलूस देखकर घर लौट रहा था, तभी सफेद घंटाघर के पास उसे भीड़ ने घेर लिया और पीट-पीटकर मार डाला। CCTV में कैद हुई वारदात, आरोपी फरार, इलाके में तनाव, परिवार की चीख से कांप उठा चूरू।

Churu Violence Case: राजस्थान के चूरू ज़िले में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे शहर को सकते में डाल दिया। यह घटना रविवार शाम की है, जब 17 वर्षीय शाहरुख, जो गोरी कॉलोनी वार्ड नंबर 4 का निवासी था, अपने दोस्तों के साथ मोहर्रम का जुलूस देखकर घर लौट रहा था। लेकिन सफेद घंटाघर चौराहे के पास पहुंचते ही उसकी जिंदगी ने मोड़ ले लिया।

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बहस बनी खूनी संघर्ष 

जानकारी के मुताबिक, सफेद घंटाघर पर कुछ अज्ञात लोगों के साथ शाहरुख की बहस हो गई थी। बहस तेज़ होते-होते कुछ ही पलों में हिंसा में बदल गई और एक दर्जन से अधिक लोगों ने शाहरुख को घेर लिया। चश्मदीदों के मुताबिक, उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। CCTV फुटेज में भी यह दृश्य साफ़ तौर पर रिकॉर्ड हुआ है, जिसमें दिखा कि एक नाबालिग लड़के को भीड़ पीट रही है, जबकि आसपास के लोग मूकदर्शक बने हुए हैं।

अस्पताल पहुंचते ही मौत 

घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से शाहरुख को चूरू के डीबी अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसकी मौत गंभीर आंतरिक चोटों से हुई।

पुलिस जांच और सुरक्षा तैनात 

जैसे ही यह खबर फैली, इलाके में तनाव का माहौल बन गया। कोतवाली, महिला थाना और सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को कड़ी निगरानी में ले लिया गया। पुलिस ने बताया कि उन्होंने आरोपियों की पहचान कर ली है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरएसी (राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी) के जवानों को भी इलाके में तैनात किया गया है ताकि शांति बनी रहे।

परिवार का आरोप: पूर्व नियोजित हत्या?

शाहरुख के परिजनों ने इस हत्या को पूर्व नियोजित साजिश बताया है। उनका कहना है कि शाहरुख की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, फिर भी उसे इतनी बेरहमी से मारा गया। मृतक का बड़ा भाई सूरत में काम करता है और घटना की सूचना मिलने के बाद वह घर रवाना हो चुका है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच की मांग 

घटना की खबर मिलते ही कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रफीक मंडेलिया अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने इस हत्या को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता जनक” बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधियों को जल्द से जल्द सज़ा मिलनी चाहिए ताकि समाज में न्याय की भावना बनी रहे।

सवालों के घेरे में कानून व्यवस्था 

चूरू की यह वारदात केवल एक हत्या नहीं, बल्कि सामाजिक तानेबाने, सांप्रदायिक संतुलन और पुलिस की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है। एक नाबालिग, जो सिर्फ जुलूस देखकर घर लौट रहा था, उसकी इस तरह हत्या होना दर्शाता है कि भीड़ की मानसिकता और कानून की पकड़ में अभी भी दूरी बनी हुई है।