Prayagraj Mahakumbh 2025 में भगदड़ से राजस्थान के दो श्रद्धालुओं की मौत, कई अब भी लापता। प्रशासन की लापरवाही पर सवाल।

अजमेर. प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान मंगलवार रात 1:30 बजे भगदड़ मच गई, जिसमें राजस्थान के दो श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई। ये श्रद्धालु मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम स्नान के लिए पहुंचे थे। हादसे में अजमेर के सरवाड़ की निहाली देवी (60) और जयपुर जिले के चौमूं क्षेत्र के जैतपुरा-अणतपुरा गांव के नाथूलाल टोडावत (85) की जान चली गई।

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प्रयागराज में पत्नी को खोजते रहे रामनारायण

निहाली देवी अपने पति रामनारायण बैरवा के साथ प्रयागराज गई थीं। उन्होंने 22 जनवरी को यात्रा शुरू की थी और अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के बाद 27 जनवरी को प्रयागराज पहुंचीं। यात्रा में करीब 50 श्रद्धालु शामिल थे। 28 जनवरी की रात जब वे संगम तट से 300 मीटर दूर थे, तब भगदड़ मच गई। अफरा-तफरी में पति-पत्नी एक-दूसरे से बिछड़ गए। रामनारायण ने पूरी रात अपनी पत्नी को खोजने की कोशिश की, लेकिन वह कहीं नहीं मिलीं। अगले दिन दोपहर 12 बजे कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि निहाली देवी का शव लखनऊ अस्पताल में है। इसके बाद रामनारायण वहां पहुंचे और पत्नी के पार्थिव शरीर को लेकर गुरुवार दोपहर अपने गांव लौटे।

महाकुंभ भगदड़ से कुछ श्रद्धालु अभी भी लापता

जयपुर के भांकरोटा से आई 60 वर्षीय सुप्यार देवी भी भगदड़ के बाद से लापता हैं। वह अपने पति दुर्गालाल मीणा के साथ कुंभ स्नान के लिए आई थीं। उनके परिवार ने प्रयागराज के समुद्र कूप थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। सुप्यार देवी के बेटे राजेंद्र मीणा अपनी मां की तलाश के लिए जयपुर से प्रयागराज रवाना हो चुके हैं।

पाली की महिला को मिला सहारा

पाली के मंडिया रोड शिव कॉलोनी की 70 वर्षीय प्यारी देवी भी भगदड़ में अपने समूह से बिछड़ गई थीं। हालांकि, राजपूती वेशभूषा में कुछ श्रद्धालुओं ने उन्हें रोते हुए देखा और मदद की। इन श्रद्धालुओं ने अपने परिचितों की मदद से महिला के परिवार से संपर्क किया और उन्हें सही सलामत घर भेजने का प्रबंध किया।

महाकुंभ भगदड़ में प्रशासन की बड़ी लापरवाही

महाकुंभ में भगदड़ जैसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन इस बार भी प्रशासन भीड़ प्रबंधन में विफल रहा। हजारों श्रद्धालु हर दिन कुंभ में स्नान के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं दिख रहे। प्रशासन को चाहिए कि वह श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए ताकि ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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