Rajasthan News : राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल हादसे ने सरकारी तंत्र और अफसरों की लापरवाही पर सवाल खड़ा कर दिया है। मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए मंजूर भी हुए…लेकिन काम नहीं हुआ, अगर काम होता तो यह हादसा नहीं होता। अब सवाल है कहां गए वो करोड़ों रुपए।

Jhalawar School Sccident: राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने से मासूम बच्चों की मौत ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि बड़ी लापरवाही का संकेत है। प्रदेश में 2000 से ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनकी बिल्डिंग जर्जर हालत में है और बच्चों की जान खतरे में बनी हुई है।

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राजस्थान के इतने स्कूलों की इमारतें जर्जर

शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 2256 स्कूलों की इमारतें जर्जर हैं, जहां कहीं छत टपक रही है तो कहीं दिवारें गिरने वाली हैं। तो कहीं बिजली, फर्नीचर और ब्लैक बोर्ड जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। कई स्कूलों में पानी टपकता है, तो कहीं लोहे के सरिए नजर आते हैं। जिनको देखकर लगता है कि यह कभी भी गिर सकते हैं। 

मरम्मत के लिए सरकार ने मंजूर किए करोड़ों कहां गए?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार ने स्कूलों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए मंजूर किए…लेकिन इमारतों की हालत देखकर नहीं लगता है कि यहां काम हुआ है। इसलिए तो यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर वह 325 करोड़ रुपए कहां गए जो सरकार ने 49 प्रमुख कार्यों के लिए मंजूर किए थे।

  • जल कार्य मरम्मत: 20,730 कार्य 
  • बिजली मरम्मत: 20,470 कार्य
  •  फर्नीचर मरम्मत: 37,535 कार्य
  •  शौचालय और हैंडवॉश: 21,408 कार्य
  •  ब्लैक बोर्ड सुधार: 26,961 कार्य

राजस्थान के हजारों स्कूलों में मरम्मत अधूरी

पिछले 15 दिनों में करीब 1.27 लाख से ज्यादा मरम्मत के काम करने का दावा तो किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। आज भी 7500 से ज्यादा स्कूलों में मरम्मत अधूरी है और बच्चे खतरे में पढ़ाई कर रहे हैं।

विधानसभा में सवाल... पर जवाब शून्य 

31 जनवरी से 24 मार्च 2025 के बीच विधानसभा सत्र में 8 विधायकों ने शिक्षा विभाग से स्कूलों की जर्जर हालत पर सवाल किए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया गया।

बड़ा सवाल: इन बच्चों का क्या कसूर?

 झालावाड़ हादसे के बाद राज्यभर में गुस्सा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब रिपोर्ट पहले से थी, बजट जारी हो चुका था, तो फिर काम क्यों नहीं हुआ? आखिर सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा मासूम बच्चों को क्यों भुगतना पड़ा?