राजस्थान में जहां एक तरफ राजपूत समाज महापंचायत कर रहा है वहीं दूसरी तरफ SC- ST समाज ने भी महापंचायत रखी है। इसमें लोगों ने सरकार के सामने समाज से जुड़ी 22 मांगों को रखा। सभा में कई नेता और विधायक भी पहुंचे।

जयपुर (jaipur news). राजस्थान में राजपूत समाज और ब्राह्मण समाज के बाद अब sc-st समाज ने भी आज जयपुर जिले में अपने समाज से जुड़ी हुई महापंचायत रखी है। इस महापंचायत में एससी-एसटी समाज से जुड़े कई नेता और पदाधिकारी शामिल हुए हैं। जयपुर के मानसरोवर स्टेडियम में चल रही इस महापंचायत में समाज के लोगों ने सरकार के सामने 22 मांगों का एक पत्र रखा है और चेताया है कि यह 22 मांगे चुनाव से पहले सरकार पूरी करें। इस महापंचायत की तैयारी जयपुर समेत आसपास के जिलों में पिछले कई हफ्तों से चल रही थी, इसमें शामिल होने के लिए राजस्थान भर से बड़ी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष आए हैं।

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अपनी मांगों को लेकर चेताया

sc-st महापंचायत के सचिव जीएल वर्मा ने बताया कि हमारी 35 से ज्यादा मांगे सरकारों के पास पेंडिंग पड़ी है। इनमें 22 मांग तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास हैं और अन्य 14 मांगे केंद्र सरकार के पास बकाया चल रही हैं। वर्मा ने कहा कि नेता और सरकार आदिवासी और दलितों को सिर्फ वोट बैंक समझते हैं। जब चुनाव का समय आता है तो भर भर के वादे करते हैं और जैसे ही चुनाव पूरे होते हैं 5 साल के लिए सभी को भुला दिया जाता है।

कई बड़े नेताओं ने की शिरकत

वर्मा ने कहा कि इस बार ऐसा नहीं होगा। जयपुर में आयोजित महापंचायत में जयपुर समेत आसपास के जिलों से करीब 20 हजार से ज्यादा लोग जुटने का दावा किया गया है। महासचिव जी एल वर्मा ने बताया कि कांग्रेस सरकार से मंत्री ममता भूपेश, टीकाराम जूली , विधायक गंगा देवी समेत अन्य कई नेता और समाज के बड़े पदाधिकारी इस महापंचायत में शामिल हुए हैं।

वापस ले पुराने दर्ज किए मुकदमे

वर्मा ने कहा कि 2 अप्रैल 2018 को जयपुर समेत कुछ जिलों में हुए बवाल के बाद एससी एसटी के लोगों पर 320 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए थे। सरकार ने इनमें से बहुत से मुकदमे अभी तक वापस नहीं लिए हैं। इससे समाज से जुड़े हुए युवा नौकरियां नहीं पा पा रहे हैं। समाज की सबसे बड़ी मांग है कि राजस्थान के कॉलेजों में समाज से जुड़े हुए लोगों को ही कुलपति बनाया जाए, ताकि sc-st से आने वाले छात्रों का भविष्य संवर सके। वर्मा ने कहा कि सरकारी भर्तियों का बैकलॉग भी अधूरा पड़ा है , उन्हें भी समय पर भरने की जरूरत है। जिससे समाज के युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिले।

इस महापंचायत में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को आधार मानकर पंचायत की शुरुआत की गई । शामिल होने वाले लोगों में से अधिकतर ने भीमराव अंबेडकर के चित्र लगी टोपिया और साफे पहन रखे थे।

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