राजस्थान हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के लिए वेब पोर्टल बनाने का आदेश दिया है। जोड़ों की सुरक्षा और कानूनी सहायता के लिए हर जिले में समिति भी बनेगी।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए एक वेब पोर्टल शुरू करने का निर्देश दिया है, जिससे वे अपने रिश्ते को आधिकारिक रूप से पंजीकृत करा सकें। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की पीठ ने सरकार को 1 मार्च 2025 तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

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लिव-इन कपल्स की याचिकाओं पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट में कई लिव-इन कपल्स ने अपने जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए याचिकाएं दायर की थीं। अदालत ने इस पर कहा, “कई जोड़े ऐसे रिश्तों में रह रहे हैं, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक अस्वीकृति के कारण उन्हें खतरा बना रहता है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर समाज में अभी भी स्वीकृति का अभाव है और ऐसे रिश्तों में रहने वाली महिलाओं की स्थिति कानूनी रूप से पत्नी जैसी नहीं होती, जिससे वे कई कानूनी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करती हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार को दिया पोर्टल बनाने का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य के प्रत्येक जिले में एक विशेष समिति बनाई जाए, जो लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों की समस्याओं को सुनेगी और समाधान निकालेगी। साथ ही, एक वेबसाइट या पोर्टल तैयार किया जाए, जहां ऐसे जोड़े अपने रिश्ते को रजिस्टर कर सकें और कानूनी सहायता प्राप्त कर सकें।

राज्य सरकार के सामने नई चुनौती

अब राजस्थान सरकार को तय करना होगा कि वह इस फैसले को स्वीकार करती है या इसे चुनौती देती है। यदि सरकार हाईकोर्ट के आदेश को मानती है, तो उसे लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के लिए नियमावली तैयार करनी होगी और फिर पोर्टल लॉन्च करना होगा।

उत्तराखंड में पहले ही लागू हो चुका है यह नियम

उत्तराखंड में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया गया है। यहां तक कि माता-पिता की अनुमति भी जरूरी रखी गई है।

नए फैसले पर समाज का क्या है कहना

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ इसे जोड़ों की सुरक्षा के लिए अच्छा कदम मान रहे हैं, तो कुछ इसे निजता में दखल बता रहे हैं। अब देखना होगा कि राजस्थान सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।

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