अलवर में ASI रामफूल मीणा की बेटी सरोज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत। सीटेट परीक्षा में असफलता के बाद मानसिक तनाव में थी। पुलिस जांच जारी।

अलवर न्यूज: राजस्थान के अलवर जिले में एक पुलिस अधिकारी की बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, सुबह अचानक उसके मुंह से झाग निकलने लगा, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि उसने जहरीला पदार्थ खा लिया था।

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सीटेट परीक्षा में असफलता बनी मौत का कारण?

मृतका की पहचान थानागाजी के क्यारा गांव निवासी सहायक उप निरीक्षक (ASI) रामफूल मीणा की बेटी सरोज मीणा (24) के रूप में हुई है। सरोज बीएससी और बीएड करने के बाद रीट (राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा) की तैयारी कर रही थी। हाल ही में उसने सीटेट (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) दी थी, लेकिन उसमें असफल हो गई थी। परिजनों का मानना है कि परीक्षा में असफल होने के कारण वह मानसिक तनाव में थी, जिससे उसने यह कदम उठाया।

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अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में हुई मौत

बुधवार सुबह सरोज रोज की तरह ब्रश कर रही थी, तभी अचानक उसके मुंह से झाग निकलने लगे। घरवालों ने तुरंत उसे नजदीकी सामान्य चिकित्सालय में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में जहरीला पदार्थ मिलने के संकेत मिले हैं, लेकिन इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

अप्रैल में होने वाली थी शादी

सरोज की शादी इसी साल अप्रैल में तय थी। परिवार उसकी शादी की तैयारियों में व्यस्त था, लेकिन अचानक हुई इस घटना से पूरा परिवार सदमे में है। पिता रामफूल मीणा दिल्ली पुलिस में सहायक उप निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं और बेटी की मौत से टूट चुके हैं।

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पुलिस जांच में जुटी

अरावली विहार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह आत्महत्या का मामला है या फिर किसी अन्य वजह से मौत हुई है।

मनोवैज्ञानिक दबाव और आत्महत्या के बढ़ते मामले

इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव से जुड़ी समस्याओं को उजागर कर दिया है। शिक्षा और करियर को लेकर युवाओं में बढ़ता तनाव चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए परिवार और समाज को मिलकर मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, ताकि कोई भी युवा इस तरह के कदम न उठाए।