झांसी के गौरव यादव को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के पहले अटेम्पट में असफलता मिली तो वह निराश हो गए और प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने की योजना बनाई। पैरेंट्स ने मोटिवेट किया तो एक बार फिर अपनी गलतियों को नजर डाली…

झांसी। झांसी के गौरव यादव को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के पहले अटेम्पट में असफलता मिली तो वह निराश हो गए और प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने की योजना बनाई। पैरेंट्स ने मोटिवेट किया तो एक बार फिर अपनी गलतियों को नजर डाली और अपनी कमियों पर काम करते हुए दूसरे प्रयास में 503वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता श्याम सुंदर यादव आगरा में एसआई के पद पर कार्यरत हैं। मॉं मीरा यादव हाउस वाइफ हैं और भाई सौरभ भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं।

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इन चीजों पर किया फोकस

वह 2021-22 की यूपीएससी एग्जाम में शामिल हुए थे। यूपीएससी की तैयारी करने वाले ज्यादातर लोग तैयारी के साथ करियर के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था की भी योजना बनाते हैं। ताकि असफल होने पर दूसरे क्षेत्रों में सफल हुआ जा सके। ठीक यही गौरव के साथ भी था। उन्होंने भी निजी क्षेत्र में नौकरी की योजना बनाई थी। पर परिवार के मोटिवेट करने के बाद उन्होंने अपनी कमियों को देखा, जहां मेहनत करने की जरुरत थी। आंसर राइटिंग भी एग्जाम का एक अहम हिस्सा है। इसके अलावा उन्होंने कॉमन नोट्स बनाए और टॉपर के वीडियो देखे। अपने सोर्स को डिफाइन कर वह रिवीजन करते रहें। इस तरह 6 से 8 घंटे तक की पढ़ाई कर उन्होंने सफलता हासिल की।

आर्मी स्कूल से हुई शुरुआती शिक्षा

गौरव की प्रारम्भिक शिक्षा आर्मी स्कूल से हुई। 2014 में 10वीं और 2016 में 12वीं पास करने के बाद वह ग्रेजुएशन करने के लिए दिल्ली चले गए। हिंदू कॉलेज में प्रवेश लिया और इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया। स्नातक करने के बाद ही वह सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए। अभी उनकी 503वीं रैंक आई है। उन्हें आईपीएस कैडर मिल सकता है। उनकी सफलता पर परिवार खुश है। घर पर बधाई देने वाले लोग आ रहे हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवा बहुत जल्द ही असफलता से निराश हो जाते हैं। चूंकि एग्जाम का सिलेबस काफी बड़ा होता है। इस वजह से उन्हें यह तय करने में काफी दिक्कत होती है कि क्या पढ़े और क्या न पढ़ें। उन्हें बहुत सारी चीजों के पीछे भागने के बजाए खुद की क्षमता का आंकलन करना चाहिए और उस लिहाज से अपनी प्लानिंग करनी चाहिए। पढ़ाई में निरंतरता बहुत जरुरी है।