मेरठ में पुलिस की शर्मनाक हरकत का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें सिपाही और होमगार्ड ने शव को ई-रिक्शा से उतारकर दूसरे थाना क्षेत्र में फेंक दिया। घटना उजागर होने पर एसएसपी ने दरोगा व सिपाही को सस्पेंड किया और विभागीय जांच शुरू की है।

मेरठ की रात जैसे किसी काली कहानी की तरह खुली, जहां कानून-व्यवस्था के रखवाले ही इंसानियत को शर्मसार करते दिखे। शहर के शांत दिखने वाले लोहियानगर इलाके में गुरुवार देर रात एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे पुलिस तंत्र पर सवाल खड़ा कर दिया। आमतौर पर मृतकों के सम्मानजनक अंतिम अधिकार सुनिश्चित करने वाली पुलिस ने खुद एक मृत शरीर को ई-रिक्शा में भरकर दूसरे थाना क्षेत्र में फेंक दिया और वहां से भाग निकले। घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद पूरा मामला सुर्खियों में आ गया है।

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कैसे सामने आया सच

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि दो वर्दीधारी एक सिपाही और एक होमगार्ड ई-रिक्शा से शव उतारते हैं, उसे सड़क किनारे पटकते हैं और फिर तेजी से वहां से फरार हो जाते हैं। फुटेज कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर फैल गया और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

एसएसपी मेरठ ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच एसपी सिटी को सौंपी। जांच में पता चला कि शव फेंकने वाले नौचंदी थाना क्षेत्र में तैनात सिपाही राजेश और होमगार्ड रोहताश थे। दोनों को घटना को छिपाने और जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसा किया गया था।

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क्यों फेंका गया शव?

जांच में सामने आया कि शव नौचंदी थाना क्षेत्र में मिला था। नियम के अनुसार संबंधित चौकी इंचार्ज को पोस्टमार्टम, केस रजिस्ट्रेशन और जांच की जिम्मेदारी उठानी होती। लेकिन अपना क्राइम रिकॉर्ड बढ़ने से बचने और अतिरिक्त जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाने के लिए दरोगा ने ही अपने मातहत सिपाही और होमगार्ड से शव को दूसरे थाना क्षेत्र में फेंकवा दिया।

यह घिनौना कदम शायद दब जाता, यदि सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे ने पूरी घटना रिकॉर्ड न की होती।

कड़ी कार्रवाई: दरोगा और सिपाही सस्पेंड

वीडियो वायरल होते ही एसएसपी मेरठ विपिन ताडा ने कार्रवाई करते हुए चौकी इंचार्ज और सिपाही को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। होमगार्ड के खिलाफ कार्रवाई के लिए कमांडेंट होमगार्ड को पत्र भेजा गया है।

एसएसपी ने यह भी कहा कि विभागीय जांच जारी है और आरोप सिद्ध होने पर संबंधित दरोगा की नौकरी भी जा सकती है।

दूसरे थाना क्षेत्र की पुलिस ने बचाई मर्यादा

जिस इलाके में शव फेंका गया था, वहां की पुलिस ने मानवता दिखाते हुए शव को कब्जे में लिया और कानूनी कार्यवाही शुरू की। यदि वे भी लापरवाही दिखाते, तो शायद शव सड़क पर ही घंटों पड़ा रहता।

मानवता पर सवाल, पुलिस व्यवस्था पर भी

मेरठ में सामने आई यह घटना न केवल एक विभागीय गलती है, बल्कि इंसानियत पर भी गंभीर चोट है। पुलिस का काम कानून का पालन करवाना और नागरिकों की सुरक्षा करना है, न कि अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मृतकों की गरिमा से खिलवाड़ करना।

यह मामला पूरे प्रदेश में पुलिस की जवाबदेही और व्यवहार सुधारने की आवश्यकता को उजागर करता है। अब सबकी निगाहें विभागीय जांच पर हैं, जो तय करेगी कि दोषियों पर क्या कड़ी कार्रवाई होगी।

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