इटली से आए तीन दोस्तों ने महाकुंभ में भारतीय संस्कृति का अनुभव किया और अपनी आत्मा से जुड़ाव महसूस किया। योग शिक्षक एमा ने कहा, उन्हें लगता है जैसे वो पिछले जन्म में भारतीय थीं। विदेशी दोस्तों ने महाकुंभ की व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की।

Prayagraj Mahakumbh 2025 : प्रयागराज के महाकुंभ में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब इटली से आए तीन दोस्तों ने भारतीय संस्कृति और परंपरा के बीच अपनी आत्मा को महसूस किया। महाकुंभ की दिव्यता ने न केवल भारतीयों को, बल्कि विदेशियों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया है। इटली के एमा, स्टीफेनो और पीटरों ने इस अद्भुत आयोजन में न केवल भाग लिया, बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रति अपना गहरा लगाव भी व्यक्त किया। इनका कहना था कि महाकुंभ में आकर उन्हें यह अहसास हुआ कि वे शायद पिछले जन्म में भारतीय थे।

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महाकुंभ की दिव्यता ने इटली के युवाओं को किया मंत्रमुग्ध

इटली से आए तीन दोस्तों - एमा, स्टीफेनो और पीटरों का कहना है कि महाकुंभ का अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहा। भारतीय संस्कृति और परंपरा के बीच यह उनका पहला अनुभव था, और उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे अनमोल क्षणों में से एक बताया। उनका कहना है कि जब वे महाकुंभ के विशाल शिविरों और धार्मिक आयोजनों के बीच पहुंचे, तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वह कहीं न कहीं भारतीय संस्कृति का हिस्सा थे।

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"पिछले जन्म में था भारतीय" - योग शिक्षक एमा

एमा, जो इटली में योग शिक्षक हैं, का कहना है कि उन्हें भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव है। महाकुंभ की पवित्रता और भक्तिमय वातावरण ने उन्हें पूरी तरह से प्रभावित किया। एमा ने कहा, “महाकुंभ की यह दिव्यता मुझे इस जीवन में ही नहीं, बल्कि पिछली पीढ़ियों में भी महसूस हो रही है। मुझे ऐसा लगता है कि मैं पिछले जन्म में भारतीय था।”

विदेशियों ने की महाकुंभ की व्यवस्थाओं की प्रशंसा

महाकुंभ की सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं ने इन विदेशियों को चकित कर दिया। उन्होंने शिविरों की साफ-सफाई, आयोजन की व्यवस्था और सुरक्षा की तारीफ की। स्टीफेनो ने कहा, “भारत में इस तरह की व्यवस्था और अनुशासन देखना बेहद आश्चर्यजनक था। महाकुंभ का आयोजन किसी वैश्विक स्तर पर किए गए आयोजन से कम नहीं था।”

भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ता आकर्षण

स्टीफेनो और पीटरों दोनों ने ही योग, भजन और कीर्तन के प्रति अपनी रुचि व्यक्त की। स्टीफेनो ने कहा कि उन्हें रूस के नागा साधु मित्रों से महाकुंभ के बारे में जानकारी मिली थी, जो पहले से ही इस आयोजन का हिस्सा बन चुके थे। यही वजह थी कि उन्होंने पहली बार महाकुंभ में आने का निर्णय लिया।

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