जालौन के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में दलित छात्राओं के साथ हो रहा है घोर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना वाला व्यवहार। शिक्षिका के अमानवीय व्यवहार ने खोल दी है जातिवाद की काली परतें। जानें क्या है सच्चाई?

Jalaun Caste Discrimination News: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के माधोगढ़ तहसील के टीहर गांव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से एक बेहद शर्मनाक और संवेदनशील घटना सामने आई है। यहां की ओबीसी यादव जाति से ताल्लुक रखने वाली शिक्षिका संध्या यादव पर दलित छात्राओं के साथ जातिगत भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना और अमानवीय व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

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‘तुम…हो, हम यादव हैं’ – छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार 

छोटे-छोटे बच्चे, जो अपने घरों से शिक्षा लेने आते हैं, उन्होंने खुलकर बताया कि उनकी यादव शिक्षिका संध्या यादव जातिसूचक और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। छात्राओं के अनुसार, उन्हें “तुम चमार हो, हम यादव हैं, हमसे दूर रहो” कहकर अलग-थलग किया जाता है। ऐसा व्यवहार न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना का भी गंभीर मामला है।

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मां-बाप खो चुकी छात्रा को शिक्षिका ने नहीं बक्शा

एक छात्रा, जिसके माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं, ने बताया कि संध्या यादव ने उससे कहा, “तुम्हारे मां-बाप तो मर गए, अब डीएम तुम्हें यहां मरने को छोड़ गया है।” यह बयान न केवल अमानवीय है, बल्कि यह दर्शाता है कि जातिगत भेदभाव की मानसिकता कितनी जड़ें जमा चुकी है।

प्राचार्या का जवाब और शिक्षा अधिकारी की जांच का आश्वासन 

मामले पर जब विद्यालय की प्रधानाचार्या साधना निरंजन से संपर्क किया गया तो उन्होंने कॉल काट दी और बाद में जवाब नहीं दिया। वहीं, विकास खंड शिक्षा अधिकारी मुक्तेश कुमार गुप्ता ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि जातिगत भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो

शिक्षिका के प्रति बच्चों ने जो कुछ भी कहा, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। जिस पर लोग सख्त टिप्पणी कर रहे हैं। कई लोगों ने तो शिक्षिका को जेल भेजने तक की मांग रखी हैं, तो कई लोगों ने ऐसी मानसिकता वाले लोगों को सरकारी नौकरी से ही बाहर करने की डिमांड रख दी है।