उत्तराखंड अब देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर कहा कि अब हमारा अगला लक्ष्य हर नागरिक को डिजिटल और वित्तीय रूप से साक्षर बनाना है।

देहरादून। उत्तराखंड अब पूरी तरह से साक्षर राज्य बन गया है। इस खास मौके पर मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के मुख्य सेवक सदन में एक कार्यक्रम हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसमें हिस्सा लिया सीएम धामी ने इस दौरान उन नव-साक्षरों (नए पढ़े-लिखे लोगों) को सम्मानित किया, जिन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) की परीक्षा पास की है।

उत्तराखंड अब देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। सीएम ने राज्य के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह कामयाबी शिक्षकों, छात्रों, नव-साक्षरों, वॉलंटियर्स और इस अभियान से जुड़े सभी लोगों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और दुर्गम इलाके में पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य हासिल करना कोई आसान काम नहीं था। यह राज्य के लोगों के मजबूत इरादे और एकजुटता को दिखाता है।

सीएम ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड ने यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने कहा,

मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद अब उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है।

सीएम ने कहा कि इस उपलब्धि से शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में अग्रणी बनने का राज्य का संकल्प और मजबूत होगा। नव-साक्षरों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। आगे बढ़ने के लिए कभी भी देर नहीं होती, यह बात इन लोगों ने साबित कर दी है। उन्होंने कहा,

शिक्षा इंसान में सिर्फ आत्मविश्वास ही नहीं जगाती, बल्कि जिंदगी में नए मौके भी लाती है।

सीएम ने कहा कि आज के समय में साक्षरता का मतलब सिर्फ पढ़ना, लिखना या अपना नाम साइन करना नहीं रह गया है। बदलते वक्त के साथ अपने अधिकारों और कर्तव्यों को जानना, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता (फाइनेंशियल लिटरेसी) और जीवन कौशल भी साक्षरता का अहम हिस्सा हैं। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में शिक्षा को आधुनिक बनाने के लगातार प्रयास हो रहे हैं। पीएम का विजन है कि कोई भी इंसान शिक्षा से वंचित न रहे। एक पढ़ा-लिखा इंसान सिर्फ अपनी जिंदगी नहीं बदलता, बल्कि अपने परिवार, समाज और देश की तरक्की में भी बड़ा योगदान देता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के संपूर्ण विकास और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर पूरा फोकस कर रही है। सीएम धामी ने बताया,

नंदा गौरा योजना के तहत योग्य छात्राओं को आर्थिक मदद दी जा रही है। दूर-दराज के इलाकों में भी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए राज्य के 500 स्कूलों में वर्चुअल क्लासरूम और एक सेंट्रल स्टूडियो बनाया जा रहा है। राज्य में 189 अटल उत्कृष्ट स्कूल चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बालश्रय योजना के तहत अनाथ बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा, हाई स्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के 100-100 स्कूलों में आधुनिक लैब बनाने का काम भी चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि पूर्ण साक्षरता को एक मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा,

अब हमारा फोकस हर नागरिक तक डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन कौशल पहुंचाने पर होना चाहिए। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य का हर नागरिक बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर चले और अपनी जिंदगी बेहतर बनाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सके।

इस मौके पर शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने का यह बड़ा मुकाम हासिल किया है। इस अभियान को सफल बनाने में करीब 25 हजार वॉलंटियर्स ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया, "राज्य ने अब अगले छह महीनों में 100 प्रतिशत साक्षरता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।"

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत साल 2035 तक उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (सकल नामांकन अनुपात) को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा गया है। उत्तराखंड इसी साल इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी गांव में एक भी बच्चा स्कूल में पढ़ रहा है, तो उस गांव का स्कूल बंद नहीं किया जाएगा।