मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जल जीवन मिशन की समीक्षा कर लंबित योजनाएं समय पर पूरी करने, हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में जल जीवन मिशन की प्रगति, वित्तीय स्थिति, योजनाओं के संचालन और रखरखाव सहित भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्यभर में चल रही पेयजल योजनाओं, ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की उपलब्धता, जल गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं के प्रभावी संचालन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में ‘हर घर जल’ का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया जाए और जो पात्र ग्रामीण परिवार अभी भी नल कनेक्शन से वंचित हैं, उन्हें तय समयसीमा के भीतर जोड़ा जाए।

हर घर जल योजना: केवल कनेक्शन नहीं, नियमित जलापूर्ति भी जरूरी

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन की सफलता केवल दिए गए नल कनेक्शनों की संख्या से नहीं मापी जा सकती। असली सफलता तब मानी जाएगी जब हर घर तक नियमित, पर्याप्त, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल लगातार पहुंच रहा हो। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है, उनका स्थलीय सत्यापन भी कराया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लोगों को वास्तव में योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

लंबित पेयजल योजनाएं मिशन मोड में पूरी करने के निर्देश

मुख्यमंत्री धामी ने निर्माणाधीन और लंबित पेयजल योजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए और जहां भी किसी प्रकार की बाधा आ रही है, वहां जिलाधिकारी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर उसका शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक योजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।

पर्वतीय क्षेत्रों में जल स्रोत संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर विशेष फोकस

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवीकरण को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के पुनर्भरण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जिले में जलापूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि लोगों को लंबे समय तक परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए स्थायी और मजबूत व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

जवाबदेही तय होगी, देरी पर होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनपदवार लक्ष्य, समयसीमा और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी योजना में अनावश्यक विलंब पाया जाता है तो संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि समयबद्ध कार्यान्वयन और नियमित निगरानी के माध्यम से ही जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।

जल जीवन मिशन प्रगति रिपोर्ट: 92 प्रतिशत से अधिक काम पूरा

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार राज्य में जल जीवन मिशन के तहत कुल 16,555 योजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें से 15,540 योजनाओं का कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि 1,015 योजनाएं अभी प्रगति पर हैं। राज्य में मिशन की औसत प्रगति 92.46 प्रतिशत दर्ज की गई है। ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराने की स्थिति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि राज्य के 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।

गांवों में हर नल से जल सत्यापन का कार्य जारी

अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि राज्य के 14,979 गांवों में से 9,796 गांवों में ‘हर नल से जल’ का सत्यापन कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष गांवों में भी सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। सरकार का फोकस अब केवल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर है कि हर घर तक गुणवत्तापूर्ण पेयजल नियमित रूप से पहुंचे और योजनाएं लंबे समय तक प्रभावी ढंग से संचालित होती रहें। बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव रोहित मीणा, झरना कमठान तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।