Uttarkashi Cloudburst: उत्तरकाशी के धराली गांव में बादल फटने से भयानक भूस्खलन हुआ। 4 की मौत, 50 से ज्यादा लोग लापता हैं। गंगोत्री धाम का सड़क संपर्क टूटा। NDRF, SDRF, सेना बचाव कार्य में जुटी, बारिश से राहत में बाधा आ रही है। 

Uttarakhand Landslide: उत्तराखंड के उत्तरकाशी के धराली गांव में मंगलवार को बादल फटा। इसके चलते हुए भीषण भूस्खलन में कम से कम 4 लोगों की मौत हुई है। 50 से ज्यादा लोग लापता हैं। इनकी तलाश की जा रही है। भूस्खलन के कारण पवित्र गंगोत्री धाम का सड़क संपर्क टूट गया है। प्रभावित क्षेत्र मुखबा में गंगा के शीतकालीन निवास और गंगोत्री धाम के निकट स्थित है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

उत्तरकाशी में अचानक आया सैलाब, सबकुछ बहा ले गया

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो शेयर किया गया है। इसमें पहाड़ी से एक प्रचंड धारा को आंधी जैसी तेज रफ्तार से बहते देखा जा सकता है। यह अपने रास्ते में आए घरों और पेड़ों को बहा ले गई। हर्षिल क्षेत्र में उफान पर चल रहे खीर गढ़ नाले ने तबाही बढ़ा दी है। DD News ने X पर घटना का वीडियो शेयर किया है। 1.56 मिनट के इस वीडियो में दिख रहा है कि कैसे अचानक सैलाब आया और जो भी सामने पड़ा उसे बहा ले गया। उत्तरकाशी पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सेना के जवान बचाव अभियान में जुटे हैं।

Scroll to load tweet…

पुष्कर सिंह धामी बोले- बेहद दुखद घटना हुई

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को "बेहद दुखद" बताया और कहा कि वह सीनियर अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। धामी ने X पर एक पोस्ट में कहा, "धराली (उत्तरकाशी) में बादल फटने से हुई भारी तबाही की खबर बेहद दुखद है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। मैं सभी की सुरक्षा की प्रार्थना करता हूं।"

Scroll to load tweet…

बारिश के कारण बचाव अभियान में हो रही परेशानी

जिला अधिकारियों के अनुसार, बंद पड़ी सड़कों और लगातार बारिश के कारण बचाव अभियान में बाधा आ रही है। लापता लोगों का पता लगाने और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। बता दें कि उत्तरकाशी में बादल फटने की घटना उत्तराखंड में व्यापक मानसूनी तबाही के बीच हुई। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रात भर लगातार बारिश के कारण सोमवार को सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए। हरिद्वार में गंगा और काली जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।