CM पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों के साथ दीपावली मनाई। सैनिकों को मिठाई खिलाई और शहीदों के परिवारों को 50 लाख रुपये की सहायता का जिक्र किया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीपावली का त्योहार देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों के साथ मनाया। देहरादून के गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सैनिकों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई और त्योहार की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने जवानों के साथ बातचीत भी की और देश की सुरक्षा के लिए उनके साहस, शौर्य और समर्पण की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक उनके लिए परिवार का हिस्सा हैं। त्योहारों पर अपने घर-परिवार से दूर रहकर देश की रक्षा करना उनके कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देशवासी जब अपने घरों में दीपावली मनाते हैं, तब हमारे जवान सीमाओं पर मुस्तैद रहकर उनकी खुशियों और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे होते हैं।
CM धामी ने गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों के साथ मनाई दीपावली
गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। उन्होंने सैनिकों को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं और उनके साथ आत्मीयता से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट के वीर जवानों के बीच आकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे वे अपने परिवार के साथ दीपावली मना रहे हों। त्योहारों की असली खुशी अपनों के बीच होती है और सैनिक भी उनके परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जब पूरा देश अपने परिवार के साथ त्योहार मना रहा होता है, तब हमारे सैनिक अपने घरों से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में लगे रहते हैं। हमारे घरों में जलने वाले दीपों के पीछे जवानों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण भी शामिल है।
सैनिक परिवार में हुआ जन्म, पिता से मिले देशसेवा और अनुशासन के संस्कार
जवानों के बीच मुख्यमंत्री धामी ने अपने परिवार से जुड़ी कुछ पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनका जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ है। उनके पिता ने सेना में रहते हुए उन्हें देशसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार दिए। यही संस्कार आज भी उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता अक्सर गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाएं सुनाया करते थे। इनमें महावीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद जसवंत सिंह रावत की वीरता और बलिदान का विशेष रूप से जिक्र होता था। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान नूरानांग मोर्चे पर जसवंत सिंह रावत ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, वह भारतीय सैन्य इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उसी गौरवशाली रेजीमेंट के जवानों के बीच मौजूद होकर उन्हें अपने पिता की बातें याद आ रही हैं। यह उनके लिए गर्व और भावुकता से भरा अवसर है।
शहीद जसवंत सिंह रावत सहित वीर सैनिकों को किया नमन
मुख्यमंत्री ने अमर शहीद जसवंत सिंह रावत सहित देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास अदम्य साहस, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवगाथाओं से भरा हुआ है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर आजादी के बाद हुए विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों तक इस रेजीमेंट के जवानों ने अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। धामी ने कहा कि उत्तराखंड की वीरभूमि ने हमेशा ऐसे वीर सपूत दिए हैं, जिनके लिए राष्ट्र सबसे पहले और कर्तव्य सर्वोपरि रहा है। देश की सुरक्षा में गढ़वाल रेजीमेंट का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
सर्जिकल स्ट्राइक से ऑपरेशन सिंदूर तक, भारत की सैन्य ताकत का किया जिक्र
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सैन्य शक्ति और सामरिक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि देश की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का साहस और पराक्रम देशवासियों के लिए गर्व का विषय है। सैनिकों की बदौलत ही देश सुरक्षित है और नागरिक अपने त्योहारों को शांतिपूर्वक मना पाते हैं।
शहीद सैनिकों के परिवारों को अब 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान व कल्याण उत्तराखंड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि में बड़ा बदलाव किया है। पहले शहीद सैनिकों के परिवारों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाती थी, जिसे बढ़ाकर अब 50 लाख रुपये कर दिया गया है।
इसके साथ ही शहीद सैनिक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत कई आश्रितों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। सरकार ने इस योजना के लिए आवेदन करने की समय-सीमा भी दो साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी है।
देहरादून में सैन्यधाम का निर्माण लगभग पूरा
मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। यह सैन्यधाम देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि सैन्यधाम के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को भी उत्तराखंड के वीर सैनिकों की गौरवशाली गाथाओं और देश के प्रति उनके समर्पण से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
दीपावली मिलन कार्यक्रम में सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद
गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में गढ़वाल मंडल आयुक्त आनन्द स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र राजीव स्वरूप, उत्तराखण्ड सब एरिया के डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर आर.एस. थापा, कर्नल प्रतुल थपलियाल, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि मोहन बिष्ट, लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित जोशी और लेफ्टिनेंट कर्नल एस.एस. सिद्दीकी उपस्थित रहे। इसके अलावा मेजर के.डी. सिंह और सूबेदार मेजर रघुवीर सिंह भण्डारी सहित अन्य सैन्य अधिकारी और जवान भी कार्यक्रम में शामिल हुए।














