उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लेखक गांव में राइटर्स विलेज इंटरनेशनल फेस्टिवल-2026 में हिस्सा लिया। दो पुस्तिकाओं का विमोचन हुआ।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के थानो स्थित लेखक गांव में आयोजित ‘राइटर्स विलेज इंटरनेशनल फेस्टिवल-2026’ के समापन समारोह में हिस्सा लिया। इस मौके पर ‘धरती का स्वर्ग उत्तराखंड’ और ‘देवभूमि का काव्य पुष्प’ पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के साहित्यकारों को सम्मान देने के साथ ही उनकी रचनाओं और पुस्तकों के प्रकाशन को भी प्रोत्साहित कर रही है। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

लेखक गांव में राइटर्स विलेज इंटरनेशनल फेस्टिवल-2026 का समापन

देहरादून के थानो स्थित लेखक गांव में साहित्य, संस्कृति, कला और शिक्षा को समर्पित राइटर्स विलेज इंटरनेशनल फेस्टिवल-2026 का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समारोह के समापन में भाग लिया। इस दौरान साहित्य और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी दो पुस्तिकाओं का विमोचन भी हुआ। इनमें ‘धरती का स्वर्ग उत्तराखंड’ और ‘देवभूमि का काव्य पुष्प’ शामिल हैं। इस आयोजन का उद्देश्य साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रोत्साहित करने के साथ भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना रहा।

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उत्तराखंड के साहित्यकारों को सम्मान दे रही धामी सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के प्रतिभाशाली साहित्यकारों और रचनाकारों को सम्मानित करने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके तहत उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान, साहित्य भूषण और लाइफटाइम अचीवमेंट जैसे सम्मानों के माध्यम से साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि साहित्यकारों का सम्मान करना राज्य की भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे प्रयासों से नई पीढ़ी को भी साहित्य और रचनात्मक लेखन से जुड़ने की प्रेरणा मिल सकती है।

हिंदी के साथ स्थानीय भाषाओं में किताबों के प्रकाशन को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार साहित्यकारों को केवल सम्मानित ही नहीं कर रही, बल्कि उनकी पुस्तकों के प्रकाशन के लिए अनुदान भी उपलब्ध करा रही है। यह सहायता हिंदी के साथ-साथ उत्तराखंड की विभिन्न स्थानीय भाषाओं में लिखी जाने वाली पुस्तकों के प्रकाशन के लिए दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय भाषाओं में रचे जा रहे साहित्य को पाठकों तक पहुंचाना और क्षेत्रीय भाषाई विरासत को आगे बढ़ाना है। इससे राज्य के साहित्यकारों को अपनी रचनाएं प्रकाशित कराने में मदद मिलने के साथ स्थानीय साहित्य को भी पहचान मिल सकती है।

उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए भी काम किया जा रहा है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, लोकभाषाओं और साहित्यिक परंपराओं को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेखक गांव जैसे आयोजन साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े लोगों को एक मंच उपलब्ध कराते हैं। साथ ही, ऐसे कार्यक्रम उत्तराखंड की पहचान को देश और दुनिया तक पहुंचाने में भी मदद कर सकते हैं।

भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान देने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य, संस्कृति, कला, शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को समर्पित इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव ने भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर दिया है। इसके साथ ही, देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में भी यह आयोजन अहम रहा। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक सहित कई अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।

इस आयोजन के जरिए साहित्यकारों, भाषा और संस्कृति से जुड़े लोगों को एक साझा मंच मिला। उत्तराखंड सरकार की ओर से साहित्यकारों के सम्मान, प्रकाशन के लिए अनुदान और साहित्यिक पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल भी इस अवसर पर चर्चा के प्रमुख विषयों में रही।