देहरादून में द टोंस ब्रिज स्कूल के संस्कार दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण, भारतीय संस्कृति, कौशल विकास और युवाओं के आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया।

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिक्षा का मकसद सिर्फ अच्छे अंक हासिल करना या करियर में सफलता पाना नहीं है। विद्यार्थियों का अच्छा इंसान बनना, उनके भीतर नैतिक मूल्यों का विकास होना और भारतीय संस्कृति व परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना पैदा होना भी उतना ही जरूरी है। ज्ञान आगे बढ़ने का रास्ता दिखाता है, लेकिन संस्कार उस रास्ते पर सही दिशा में चलने की प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री गुरुवार को देहरादून स्थित द टोंस ब्रिज स्कूल में आयोजित संस्कार दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को महत्व देने के लिए विद्यालय की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी, चरित्र और निरंतर मेहनत को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील भी की।

संस्कार दिवस पर CM धामी का संदेश, शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण जरूरी

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि संस्कार दिवस केवल किसी विद्यालय की स्थापना का उत्सव नहीं है। यह भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर भी है। उनके मुताबिक, शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब वह विद्यार्थियों को शैक्षणिक और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के साथ एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने में भी मदद करे।

उन्होंने कहा कि जीवन में ज्ञान के साथ चरित्र, अनुशासन, ईमानदारी और नैतिकता का विशेष महत्व है। आधुनिक शिक्षा हासिल करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ अपने मूल्यों को समझना और उन्हें व्यवहार में उतारना भी उतना ही अहम है। मुख्यमंत्री ने द टोंस ब्रिज स्कूल में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को महत्व दिए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा लेने की अपील, 'Wings of Fire' पढ़ने को कहा

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने द टोंस ब्रिज स्कूल की स्थापना से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विद्यालय का उद्घाटन वर्ष 2015 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन आज भी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने जीवन से साबित किया कि बड़े सपने देखना जरूरी है, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत, दृढ़ संकल्प और चुनौतियों का सामना करने का साहस भी होना चाहिए।

धामी ने विद्यार्थियों को डॉ. कलाम की आत्मकथा Wings of Fire (अग्नि की उड़ान) पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में दर्ज उनके अनुभव विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य तय करने, कठिन परिस्थितियों से सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकते हैं।

आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कृति का मेल जरूरी: मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रौद्योगिकी, नवाचार और आधुनिक विज्ञान के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में नई तकनीकों, कौशल और रचनात्मकता की भूमिका और बढ़ेगी। ऐसे में विद्यार्थियों को बदलते दौर की जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विषयों में दक्षता हासिल करने के साथ योग, ध्यान, अनुशासन और अच्छे संस्कारों को भी जीवन में जगह देनी चाहिए। तकनीकी ज्ञान और भारतीय जीवन मूल्यों का संतुलन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को मजबूत बना सकता है। उनके अनुसार, आज के विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा की जरूरत है, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करे और साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़े रखे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उत्तराखंड सरकार का फोकस, कौशल विकास पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल विकास और रचनात्मकता को विशेष महत्व दिया गया है। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानना और उन्हें व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार करना भी है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का जोर युवाओं को ऐसी शिक्षा और कौशल उपलब्ध कराने पर है, जिससे वे रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें और अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के विकल्पों पर भी ध्यान देना चाहिए। युवा अपना काम शुरू कर सकें और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें, तो इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उत्तराखंड में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी, नकल विरोधी कानून का जिक्र

मुख्यमंत्री ने युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के लिए राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल पर रोक लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। धामी के अनुसार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के तहत पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने इसे युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता से जोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता युवाओं के भरोसे के लिए जरूरी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उचित अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ सकें।

'विकल्प रहित संकल्प' के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका: CM धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने 'विकल्प रहित संकल्प' को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षित, संस्कारित, कुशल और आत्मनिर्भर युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि द टॉसब्रिज स्कूल के विद्यार्थी ज्ञान, प्रतिभा और अच्छे संस्कारों के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। उनके मुताबिक, युवाओं को आधुनिक समय की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ उनमें जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों की भावना विकसित करना भी जरूरी है। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े पदाधिकारी, शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।