उत्तराखंड का सड़क नेटवर्क 51 हजार किमी के पार पहुंच गया है। CM पुष्कर सिंह धामी ने इसे बेहतर कनेक्टिविटी और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य से जोड़ा।

उत्तराखंड में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा अपडेट साझा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य में सड़क नेटवर्क का लगातार विस्तार हुआ है और अब उत्तराखंड का सड़क नेटवर्क 51 हजार किलोमीटर से अधिक हो गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बेहतर सड़कें, सुगम परिवहन और मजबूत कनेक्टिविटी उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने के संकल्प को नई गति दे रही हैं। धामी ने इसे राज्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार से जोड़ते हुए ‘डबल इंजन सरकार’ के कामकाज का परिणाम बताया है।

Uttarakhand Road Connectivity: 51 हजार किमी के पार पहुंचा नेटवर्क

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक, उत्तराखंड का कुल सड़क नेटवर्क अब 51 हजार किलोमीटर के आंकड़े को पार कर चुका है। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के लिए सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं। इनका सीधा संबंध गांवों, पर्यटन स्थलों, बाजारों और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच से भी है।

हालांकि, मुख्यमंत्री के ट्वीट में 51 हजार किलोमीटर के आंकड़े का विभागवार या सड़क की श्रेणीवार ब्रेकअप नहीं दिया गया है। इसलिए इसे राज्य के कुल सड़क नेटवर्क के रूप में मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़े के तौर पर देखा जाना चाहिए। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 16 जुलाई 2026 तक उत्तराखंड में 21,902 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें पूरी की जा चुकी थीं और 1,860 बस्तियों को कनेक्टिविटी मिली थी।

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Double Engine Government: ग्रामीण इलाकों तक सड़क पहुंचाने पर जोर

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा सवाल दूरदराज की बस्तियों तक पहुंच का है। केंद्र की PMGSY-IV योजना के तहत भी राज्य को ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का हिस्सा मिला है। जनवरी 2026 में केंद्र ने उत्तराखंड समेत छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 10 हजार किलोमीटर से ज्यादा ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इन परियोजनाओं से लगभग 3,270 ऐसी बस्तियों को कनेक्टिविटी मिलने का लक्ष्य है, जो पहले अलग-थलग थीं।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए PMGSY के तहत उत्तराखंड में 566 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य भी तय किया गया है। इसके साथ 38 छोटे पुलों और 34 बस्तियों से जुड़ी कनेक्टिविटी का लक्ष्य दर्ज है। इससे साफ है कि सड़क नेटवर्क के विस्तार में केवल बड़े हाईवे ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और अंतिम छोर की कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Uttarakhand Highway Projects: देहरादून बाईपास से ट्रैफिक को राहत की तैयारी

उत्तराखंड में सड़क कनेक्टिविटी का विस्तार कई बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स के जरिए भी हो रहा है। इनमें देहरादून का ग्रीनफील्ड बाईपास प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। NHAI करीब 12 किलोमीटर लंबे फोर-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड बाईपास का निर्माण कर रहा है। यह परियोजना दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ेगी और देहरादून शहर के भीतर गैर-जरूरी ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में काम करेगी। अप्रैल 2026 तक परियोजना की करीब 44 प्रतिशत प्रगति बताई गई थी और इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना की लागत करीब 716 करोड़ रुपये है। यानी राज्य में कनेक्टिविटी की तस्वीर सिर्फ ग्रामीण सड़कों तक सीमित नहीं है। शहरों के आसपास ट्रैफिक मैनेजमेंट और बड़े आर्थिक कॉरिडोर से जुड़ाव भी इसका हिस्सा है।

पहाड़ों में सड़क और ऑल-वेदर कनेक्टिविटी क्यों अहम?

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति सड़क निर्माण को दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनाती है। पहाड़ी इलाके, भूस्खलन, बारिश और बर्फबारी जैसी परिस्थितियों में सड़क को बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का असर सिर्फ यात्रा के समय तक सीमित नहीं रहता। गांवों से कृषि और स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, छात्रों की आवाजाही और पर्यटन गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ता है। इसी वजह से केंद्र सरकार की ग्रामीण सड़क योजनाओं में दूरदराज और कठिन इलाकों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था है। PMGSY के तहत पहाड़ी और विशेष श्रेणी वाले क्षेत्रों के लिए पात्रता मानकों में भी अलग प्रावधान हैं।

Uttarakhand Connectivity: सड़क के साथ हाईवे और दूसरे विकल्पों पर भी फोकस

राज्य में कनेक्टिविटी का विस्तार सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। केंद्र ने उत्तराखंड में चारधाम और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच सुधारने के लिए रोपवे जैसी परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। मार्च 2025 में सोनप्रयाग से केदारनाथ के बीच 12.9 किलोमीटर रोपवे परियोजना को मंजूरी दी गई थी। इसकी अनुमानित लागत 4,081.28 करोड़ रुपये है।

इसके अलावा जुलाई 2026 में भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेनिंग परियोजना से जुड़े करीब 20 किलोमीटर के प्रोजेक्ट की जानकारी भी सामने आई। इस परियोजना में वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए एलिफेंट अंडरपास और अन्य सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं। वहीं, जून 2026 में उत्तराखंड में करीब 4,026 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति की समीक्षा की गई थी।

CM Dhami का Developed Uttarakhand पर फोकस

मुख्यमंत्री धामी ने अपने पोस्ट में सड़क नेटवर्क के विस्तार को विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य से जोड़ा है। उनका कहना है कि बेहतर सड़कें और मजबूत कनेक्टिविटी राज्य में परिवहन को आसान बनाने के साथ विकास की गति बढ़ाने में मदद करेंगी। उत्तराखंड के लिए यह मुद्दा खास है क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था में पर्यटन, तीर्थाटन, स्थानीय कारोबार और पहाड़ी क्षेत्रों की बाजारों तक पहुंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सड़क नेटवर्क जितना व्यापक होगा, इन क्षेत्रों के बीच संपर्क उतना ही मजबूत हो सकता है।

हालांकि, सड़क नेटवर्क की लंबाई बढ़ना एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संकेतक है, लेकिन पहाड़ी राज्य में सड़क की गुणवत्ता, रखरखाव, सालभर आवाजाही और भूस्खलन जैसे जोखिम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए आने वाले समय में सिर्फ नेटवर्क बढ़ाने के साथ मौजूदा सड़कों की टिकाऊपन और सुरक्षा पर भी नजर रहेगी।