दूरसंचार कंपनियों के संगठन सीओएआई ने शनिवार को कहा कि कर्ज बोझ तले दबा दूरसंचार क्षेत्र लॉकडाउन के दौरान नकदी संकट से बचने के लिए तीन महीने तक कर्ज किस्त अदा न करने का विकल्प चुन सकता है

नई दिल्ली: दूरसंचार कंपनियों के संगठन सीओएआई ने शनिवार को कहा कि कर्ज बोझ तले दबा दूरसंचार क्षेत्र लॉकडाउन के दौरान नकदी संकट से बचने के लिए तीन महीने तक कर्ज किस्त अदा न करने का विकल्प चुन सकता है।

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सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने कहा कि दूरसंचार परिचालकों ने जल्द से जल्द मोबाइल कॉल और इंटरनेट दरों को बढ़ाने की बात की है, लेकिन वे बंद के दौरान कीमतों नहीं बढ़ाएंगे।

तीन महीने कर्ज किस्त नहीं चुकाने के विकल्प

मैथ्यूज ने कहा, ‘‘दूरसंचार परिचालकों पर भारतीय बैंकों का लगभग 1.6 से दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। वे नकदी बनाए रखने के लिए तीन महीने तक कर्ज किस्त नहीं चुकाने के विकल्प को चुनेंगे। यह उनके लिए राहत की बात है।’’

आरबीआई ने शुक्रवार को बैंकों को तीन महीने के लिए सभी अवधि के कर्ज पर ईएमआई भुगतान पर रोक लगाने की अनुमति दी थी। इसके साथ ही रेपो दरों में कटौती का भी ऐलान किया। भारतीय सेल्युलर ऑपरेटर संघ (सीओएआई) ने निकट भविष्य में दूरसंचार परिचालकों द्वारा शुल्क बढ़ाए जाने की आशंका भी जताई है।

शुल्क दरों को यथावत रखेंगी कंपनियां

मैथ्यूज ने कहा, ‘‘दूरसंचार कंपनियां बाजार की स्थिति को समझती हैं। वे फिलहाल शुल्क दरों को यथावत रखेंगी।’’दूरसंचार परिचालक कॉल और डेटा के लिए न्यूनतम शुल्क तय करने के लिए कह रहे हैं। वोडाफोन आइडिया ने सुझाव दिया है कि एक अप्रैल 2020 से न्यूनतम शुल्क दरें तय की जानी चाहिए।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

(फाइल फोटो)