मस्क के अनुसार भारत में जियो को टक्कर देने के लिए स्टारलिंक को सस्ता करना होगा। वहीं, जियो भी 2026 तक 1600 सैटेलाइट्स के साथ इंटरनेट बाजार में उतरेगा। फिलहाल दोनों कंपनियों को सरकारी मंजूरी का इंतजार है।
एलन मस्क ने कहा है कि अगर भारत में रिलायंस जियो के सस्ते इंटरनेट को टक्कर देनी है, तो स्टारलिंक की कीमतें आम आदमी के बजट में लानी होंगी। स्पेसएक्स के बॉस के इस बयान से साफ है कि भारतीय बाजार में टिकने के लिए वे यहां के हिसाब से ही दाम तय करेंगे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर मस्क ने उन दावों का जवाब दिया जिनमें कहा जा रहा था कि स्टारलिंक जियो के सस्ते प्लान्स का मुकाबला नहीं कर पाएगा। मस्क ने लिखा कि अगर स्टारलिंक महंगा हुआ, तो भारत में इसे कोई नहीं खरीदेगा। इसलिए इसे सस्ता बनाना स्पेसएक्स की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि तगड़े कॉम्पिटिशन से भारतीय ग्राहकों को ही फायदा होगा और उन्हें ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे। हालांकि, मस्क ने अभी तक भारत में स्टारलिंक की कीमतों या लॉन्च डेट का कोई ऑफिशियल ऐलान नहीं किया है।
भारत में इंटरनेट के दामों पर बहस
मस्क का यह बयान तब आया जब यह बहस छिड़ी कि भारत में इंटरनेट सस्ता होने की बात सिर्फ मोबाइल डेटा तक सीमित है। मैक33 फाइनेंशियल ग्रुप (Mac33 Financial Group) के फाउंडर आरोन बर्नेट की एक एक्स पोस्ट पर मस्क ने यह रिप्लाई किया था। बर्नेट ने बताया था कि भारत में मोबाइल यूजर्स हर महीने करीब 30 से 40 जीबी डेटा इस्तेमाल करते हैं, जबकि घरों में लगे फाइबर ब्रॉडबैंड कनेक्शन में यह खपत 300 जीबी तक होती है। उन्होंने कहा कि अगर सस्ते ब्रॉडबैंड ऑप्शन मिलें, तो ज्यादा से ज्यादा परिवार फिक्स्ड इंटरनेट कनेक्शन लगवाएंगे।
स्टारलिंक धरती की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) वाले सैटेलाइट्स के जरिए इंटरनेट सर्विस देता है। यह तकनीक उन दूरदराज के इलाकों में बहुत काम आती है जहां फाइबर केबल बिछाना या मोबाइल टावर लगाना मुश्किल होता है। लेकिन भारत में ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को जोड़ने के लिए स्टारलिंक को मौजूदा कंपनियों से काफी सस्ता और बेहतर प्लान देना होगा।
सैटेलाइट इंटरनेट की रेस में जियो भी तैयार
मस्क के इस बयान के बीच रिलायंस जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट में उतरने की पूरी तैयारी कर रहा है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस में कंपनी ने 2026 तक के अपने प्लान का खाका पेश किया था, जिसमें करीब 1,600 ऑर्बिट सैटेलाइट्स और देशभर में 23 ग्राउंड स्टेशन बनाने की बात कही गई थी। जियो का टारगेट 6 लाख से ज्यादा गांवों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना है।
इस प्रोजेक्ट का मकसद दूरदराज के द्वीपों और सीमावर्ती इलाकों में इंटरनेट पहुंचाना है, जहां नॉर्मल नेटवर्क नहीं पहुंच पाता। कंपनी अपने मौजूदा मोबाइल और फाइबर नेटवर्क को सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ जोड़ने की प्लानिंग कर रही है। हालांकि, जियो का सैटेलाइट नेटवर्क और ग्राउंड स्टेशन अभी प्रपोजल स्टेज में ही हैं। इस बीच, स्टारलिंक और जियो दोनों ही सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र सरकार की फाइनल सिक्योरिटी क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं।
अंबानी के साथ जुबानी जंग जारी
भारत में स्टारलिंक की एंट्री का विरोध करने वालों पर मस्क पहले भी कई बार निशाना साध चुके हैं। हाल ही में मस्क ने तंज कसते हुए मुकेश अंबानी को 'प्रधानमंत्री अंबानी' (PM Ambani) कह दिया था और मांग की थी कि स्टारलिंक को भारत में कॉम्पिटिशन करने की इजाजत मिलनी चाहिए।
मस्क का तर्क है कि स्टारलिंक की मदद से उन इलाकों के बच्चों को पढ़ाई का कंटेंट मिलेगा जहां भरोसेमंद इंटरनेट नहीं है। साथ ही, छोटे कारोबारियों को भी नए ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है कि अप्रूवल प्रोसेस में जियो का फेवर किया जा रहा है। मस्क के इस ताजा बयान पर रिलायंस की तरफ से अभी तक कोई रिएक्शन नहीं आया है।
भारत के सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट में जब स्टारलिंक और जियो आमने-सामने होंगे, तो कीमतें, सर्विस की क्वालिटी और सिक्योरिटी क्लीयरेंस सबसे अहम फैक्टर होंगे। स्टारलिंक भारत में कितना कामयाब होगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वे सच में आम आदमी के बजट वाला प्लान दे पाते हैं या नहीं।
