दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट Facebook ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) पर आधारित एक ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप किया है, जो 100 से ज्यादा भाषाओं में ट्रांसलेशन कर सकता है। यह सॉफ्टवेयर मशीन लर्निंग के जरिए यह ट्रांसलेशन करता है और इसके लिए अंग्रेजी भाषा की जरूरत नहीं होती।

टेक डेस्क। दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट Facebook ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) पर आधारित एक ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप किया है, जो 100 से ज्यादा भाषाओं में ट्रांसलेशन कर सकता है। यह सॉफ्टवेयर मशीन लर्निंग के जरिए ट्रांसलेशन करता है और इसके लिए अंग्रेजी भाषा की जरूरत नहीं होती। फेसबुक का दावा है कि यह अपनी तरह का पहला सिस्टम है। 

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करोड़ों यूजर्स को मिलेगा फायदा
दुनिया भर में फेसबुक के करोड़ों यूजर्स हैं, जो अलग-अलग लैंग्वेज में इस पर कंटेंट शेयर करते हैं। माना जा रहा है कि फेसबुक पर यूजर्स करीब 100 से ज्यादा भाषाओं में कंटेंट शेयर करते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले ट्रांसलेशन टूल की मदद से यूजर्स को काफी सहूलियत मिलेगी। फेसबुक से जुड़ी रिसर्च असिस्टेंट एंजेला फैन ने कहा है कि मशीन ट्रांसलेशन के मामले में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म पर 160 से ज्यादा लैंग्वेज में कंटेंट शेयर करने के लिए यह सॉफ्टवेयर तैयार किया है। 

कैसे करता है काम
यह नया मॉडल मौजूदा सिस्टम्स के मुकाबले काफी बेहतर है, क्योंकि यह अंग्रेजी पर बेस्ड नहीं है। फैन ने अपने ब्लॉगपोस्ट में लिखा है कि ट्रांसलेट करते वक्त ज्यादातर इंग्लिश सेंट्रिक मल्टीलिंगुअल मॉडल्स पहले किसी भाषा से इंग्लिश और फिर इंग्लिश से दूसरी लैंग्वेज में ट्रांसलेशन करते हैं। इसकी वजह यह है कि इंग्लिश ट्रेंनिंग डेटा कहीं भी और आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि फेसबुक का यह मॉडल इंग्लिश की मदद नहीं लेता है और सही ट्रांसलेट करता है।

रोज होते हैं 20 अरब ट्रांसलेशन
फेसबुक का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर न्यूज फीड में रोज करीब 20 अरब ट्रांसलेशन किए जाते हैं और नए सिस्टम की मदद से इनमें बेहतर परिणाम सामने आ सकेंगे। फेसबुक का कहना है कि मशीन ट्रांसलेशन के जरिए लैंग्वेज बैरियर को खत्म किया जा रहा है और यह लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने और पास लाने का सबसे बेहतर तरीका है।