फोन-पे की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि इन दोनों कंपनियों का अलग-अलग होकर काम करना शेयरहोल्डर्स के लिए भारतीय टेक ईको सिस्टम में नई संभावनाओं को जन्म देगा जो सभी के लिए फायदेमंद होगा।

टेक डेस्क. प्रमुख पेमेंट एप्स में से एक फोन-पे ने फ्लिपकार्ट से अलग होने की प्रक्रिया पूर कर ली है। दोनों कंपनियों ने संयुक्त बयान जारी कर अलग होने की पुष्टि की है। हालांकि, अलग होने का ये निर्णय भविष्य की नई संभावनाओं को देखते हुए लिया गया है। दोनों कंपनियां अलग होने के बाद अलग-अलग बिजनेस एंटिटी बन गई हैं। पहले फोन-पे फ्लिपकार्ट के अंतर्गत आता था पर अब फोन-पे भी एक अगल एंटिटी बन चुकी है। हालांकि, दोनों कंपनियां वॉलमार्ट के अंतर्गत ही रहेंगी और इनमें प्रमुख हिस्सेदारी वॉलमार्ट (Walmart) की ही है।

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पूरी तरह भारतीय कंपनी बनी फोन पे

कंपिनयों की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अलग होने की प्रक्रिया पूरी होने के साथ वॉलमार्ट के अंतर्गत आने वाले फ्लिपकार्ट सिंगापुर और फोन-पे सिंगापुर के शेयरहोल्डर्स ने सीधे फोन-पे भारत के शेयर खरीद लिए हैं। इससे फोन-पे अब पूरी तरह भारतीय कंपनी बन गई है। फोन-पे की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि इन दोनों कंपनियों का अलग-अलग होकर काम करना शेयरहोल्डर्स के लिए भारतीय टेक ईको सिस्टम में नई संभावनाओं को जन्म देगा जो सभी के लिए फायदेमंद होगा।

फोन-पे लाॅन्च करेगा अपना आईपीओ

इस मौके पर फोन-पे के सीईओ समीर निगम ने कहा कि विकास की इस यात्रा में अब हम इंश्योरेंस, वेल्थ मैनेजमेंट और लोन के क्षेत्र में निवेश कर व्यवसाय को आगे बढ़ाएंगे। इसके साथ ही हम भारत में यूपीआई पेमेंट के क्षेत्र में विकास की नई लहर के साथी होंगे। सीईओ निगम ने आगे कहा कि इसकी बदौलत हमें भारत के करोड़ों लोगों को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के विजन में नई गति मिलेगी। बता दें कि फ्लिपकार्ट और फोन-पे के अलग होने का फैसला तब आया है जब फोन-पे भारत में अपना खुद का आईपीओ लॉन्च करने वाला है।

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