मुंबई CSMT में फ्री वाई-फाई से जुड़े संभावित साइबर फ्रॉड में ₹4.27 लाख के ट्रांजैक्शन हुए। जानिए पब्लिक वाई-फाई, फेक APK और मैलवेयर से जुड़े 5 बड़े खतरे और बचने के तरीके।

Free Wi-Fi Scam: रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मॉल या कैफे में फ्री वाई-फाई दिखते ही कई लोग तुरंत फोन कनेक्ट कर लेते हैं। आखिर जब इंटरनेट मुफ्त मिल रहा हो तो कोई क्यों छोड़ेगा? लेकिन मुंबई में हाल ही में हुए एक केस ने पब्लिक वाई-फाई को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) रेलवे स्टेशन पर एक बैंक अधिकारी को फ्री वाई-फाई इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। पुलिस को शक है कि इस पूरे मामले की शुरुआत पब्लिक वाई-फाई से हो सकती है। आइए जानते हैं कि यह खतरनाक खेल कैसे हुआ और स्टेशन या मॉल में इंटरनेट चलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

मुंबई CSMT में आखिर क्या हुआ?

एक बैंक के जनरल मैनेजर के क्रेडिट कार्ड से बिना किसी अनुमति के 4.27 लाख रुपए निकाल लिए गए। जब पुलिस ने इसकी गहराई से जांच की, तो माजरा समझ आया। पुलिस को शक है कि सबसे पहले बैंक अधिकारी के पर्सनल सेक्रेटरी ने CSMT स्टेशन पर मिलने वाले मुफ्त वाई-फाई से अपने फोन को कनेक्ट किया था। यहीं से जालसाजों ने उनके फोन में चुपके से मैलवेयर (वायरस) भेजकर फोन को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद हैक किए गए फोन से एक खतरनाक APK फाइल भेजी गई। यह फाइल आरटीओ (RTO) के फर्जी चालान के रूप में उनके फोन की कांटेक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों (जिनमें सीनियर बैंक अधिकारी भी शामिल थे) को भेजी गई। इस तरह वायरस एक फोन से दूसरे फोन में फैलता गया और आखिर में बैंक अधिकारी का खाता खाली हो गया।

फ्री वाई-फाई से खतरा क्या है?

हर फ्री वाई-फाई खतरनाक नहीं होता है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, होटल या दूसरी जगहों पर उपलब्ध आधिकारिक फ्री फाई-फाई सामान्य तौर पर इस्तेमाल के लिए दिया जाता है। समस्या तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति बिना जांच किए किसी अनजान या फर्जी Wi-Fi नेटवर्क से जुड़ जाए या पब्लिक नेटवर्क (Public Network) पर सेंसेटिव काम करने लगे। साइबर क्रिमिनल्स कभी-कभी लोगों को आकर्षित करने के लिए असली नेटवर्क जैसे नाम वाले फेक वाई-फाई (Fake Wi-Fi) नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे नेटवर्क से जुड़ने के बाद आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी को निशाना बनाने की कोशिश हो सकती है। इसीलिए सिर्फ यह देखकर वाई-फाई से कनेक्ट न करें कि उसके आगे 'फ्री' लिखा हुआ है।

Free Wi-Fi इस्तेमाल करने के 5 बड़े रिस्क

फ्री वाई-फाई नेटवर्क में फंस सकते हैं

मान लीजिए आप रेलवे स्टेशन पर हैं और आपको कई वाई-फाई नेटवर्क दिखाई देते हैं। इनमें से कोई नेटवर्क स्टेशन के नाम जैसा दिख रहा है। ऐसे में बिना यह कंफर्म किए कि नेटवर्क आधिकारिक है, उससे कनेक्ट करना रिस्की हो सकता है। साइबर अपराधी कभी-कभी भरोसेमंद नाम से मिलते-जुलते नेटवर्क का इस्तेमाल लोगों को जोड़ने के लिए कर सकते हैं। इसलिए किसी भी पब्लिक वाई-फाई से जुड़ने से पहले उसका नाम और इस्तेमाल करने का तरीका आधिकारिक सोर्स से चेक करें।

Public Wi-Fi पर बैंकिंग करने से बचें

फ्री वाई-फाई से जुड़े हैं तो उस समय बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड मैनेजमेंट या कोई दूसरा बेहद संवेदनशील काम करने से बचना बेहतर है। अगर आपको बैंक का जरूरी काम करना ही है, तो मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करना ज्यादा सेफ ऑप्शन हो सकता है। ध्यान रखें, मुफ्त इंटरनेट के लिए अपनी जरूरी बैंकिंग जानकारी को जोखिम में डालना सही सौदा नहीं है।

फेक लिंक या APK ज्यादा बड़ा खतरा बन सकता है

मुंबई के इस मामले में RTO चालान के नाम पर APK फाइल भेजे जाने की बात सामने आई है। यही तरीका आम लोगों के लिए भी बड़ा सबक है। अगर वॉट्सऐप (WhatsApp), SMS या किसी दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कोई अनजान व्यक्ति या कॉन्टैक्ट आपको कोई APK भेजता है, तो उसे तुरंत डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। खासकर अगर मैसेज में लिखा हो कि आपका ट्रैफिक चालान है, KYC अपडेट करना है, बैंक अकाउंट बंद होने वाला है, बिजली का बिल जमा करें, पार्सल रोक दिया गया है और कोई सरकारी फॉर्म भरना है, तो पहले उसकी सच्चाई चेक करें। Unknown APK को इंस्टॉल करना आपके फोन के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

एक फोन से कई लोगों तक पहुंच सकता है स्कैम

मुंबई केस में जिस तरीके की जांच की जा रही है, उसमें एक संक्रमित फोन के कॉन्टैक्ट्स को APK भेजे जाने की बात सामने आई है। यानी खतरा सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता है। अगर किसी के फोन से उसके कॉन्टैक्ट्स को संदिग्ध फाइल भेजी जाती है और सामने वाला उस फाइल को भरोसे में आकर इंस्टॉल कर लेता है, तो ठगी का दायरा और बढ़ सकता है। इसीलिए आपके किसी परिचित के नंबर से भी APK या संदिग्ध लिंक आए तो आंख बंद करके भरोसा न करें। पहले उस व्यक्ति को कॉल करके पूछें कि उसने वास्तव में वह फाइल भेजी है या नहीं।

फोन में Malware पहुंचने का खतरा

मैलवेयर ऐसे खतरनाक सॉफ्टवेयर या कोड को कहा जाता है जो फोन या दूसरे डिवाइस को नुकसान पहुंचा सकता है या आपकी जानकारी को निशाना बना सकता है। अगर कोई संदिग्ध APK इंस्टॉल हो जाए तो समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे में फोन की कुछ जानकारियां या गतिविधियां साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकती हैं। इसलिए फोन में कोई भी ऐप सिर्फ इसलिए इंस्टॉल न करें क्योंकि किसी मैसेज में उसका लिंक आया है।

फ्री वाई-फाई इस्तेमाल करना है तो ध्यान रखें ये 5 बातें

  1. सिर्फ ऑफिशियल वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट करें।
  2. पब्लिक वाई-फाई पर बैंकिंग या बेहद सेंसेटिव काम करने से बचें।
  3. किसी भी अनजान APK को डाउलनोड या इंस्टॉल न करें।
  4. काम खत्म होने के बाद वाई-फाई को डिस्कनेक्ट कर दें और जरूरत न हो, तो ऑटो-कनेक्ट बंद रखें।
  5. फोन और Apps को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर रखें।

फोन में APK फाइल आए तो क्या करें?

अगर आपको वॉट्सऐप या SMS पर अचानक कोई APK फाइल मिलती है तो सबसे पहले उसे इंस्टॉल न करें। अगर फाइल RTO, बैंक, बिजली विभाग या किसी सरकारी सेवा के नाम से आई है, तो संबंधित विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट या App से जानकारी चेक करें। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK को खोलने की कोशिश भी न करें। और अगर गलती से APK Install कर चुके हैं, तो मामले को हल्के में न लें। इंटरनेट बंद करके संदिग्ध ऐप को हटाने, जरूरी पासवर्ड बदलने और अपने बैंक या कार्ड से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने जैसे कदम तुरंत उठाएं। जरूरत पड़ने पर बैंक को भी जानकारी दें।