केंद्र ने पिछले 5 महीनों में 'सहयोग' पोर्टल के जरिए सोशल मीडिया से 1.95 लाख कंटेंट हटाने का आदेश दिया। ये आदेश IT एक्ट के तहत दिए गए, जिनमें से आधे इंस्टाग्राम को मिले। मेटा का सिस्टम इन पर ऑटोमैटिक कार्रवाई करता है।

नई दिल्ली: एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले पांच महीनों में केंद्र सरकार की एजेंसियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को करीब दो लाख पोस्ट और कंटेंट हटाने के आदेश दिए हैं। ये सभी आदेश गृह मंत्रालय के 'सहयोग' पोर्टल के जरिए जारी किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर पर हुए CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसे आदेशों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई। आंकड़े बताते हैं कि औसतन हर दिन 1,275 ऑर्डर दिए गए, यानी हर 68 सेकंड में एक कंटेंट हटाने का निर्देश। मेटा का ऑटोमेटेड सिस्टम इन सरकारी आदेशों के आधार पर खुद ही पोस्ट हटा देता है।

गृह मंत्रालय ने 'सहयोग' पोर्टल इसलिए बनाया है ताकि केंद्र और राज्य सरकार की सभी एजेंसियां इसके जरिए सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के लिए शिकायत दर्ज करा सकें। पिछले 5 महीनों में, अलग-अलग सरकारी एजेंसियों ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को 1,95,000 पोस्ट हटाने की रिक्वेस्ट भेजी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर पोस्ट CJP के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हटाए गए।

एजेंसियां ये आदेश सूचना प्रौद्योगिकी कानून (IT Act) की धारा 79(3)(b) के तहत भेजती हैं। कुल आदेशों में से लगभग आधे (करीब 1 लाख) मेटा के इंस्टाग्राम को मिले। इसकी एक वजह यह भी है कि छात्र आंदोलनों के लिए इंस्टाग्राम एक बड़ा जरिया बन गया है। वहीं, फेसबुक को करीब 80,000 और यूट्यूब को लगभग 15,000 पोस्ट हटाने के आदेश मिले।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि एक रिक्वेस्ट में एक जैसे सैकड़ों पोस्ट हटाने के लिए कहा जा सकता है। इसलिए, कुल कितने पोस्ट हटाए गए, इसका सटीक आंकड़ा मिलना मुश्किल है। 1,95,000 सिर्फ सरकारी आदेशों की संख्या है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मेटा ने 'सहयोग' पोर्टल के साथ अपना सिस्टम इंटीग्रेट कर लिया है, जिससे सरकारी आदेशों पर ऑटोमैटिक तरीके से पोस्ट हटा दिए जाते हैं। शायद यही वजह है कि कई बार पोस्ट हटा दिए जाते हैं और बाद में कंपनी को माफी मांगनी पड़ती है।