मेटा अपने CEO मार्क जकरबर्ग का एक एडवांस 3D AI अवतार बना रही है। यह न सिर्फ उनकी तरह दिखेगा, बल्कि उनकी ही आवाज में बात भी करेगा। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को CEO तक सीधी पहुंच का अनुभव देना है।

कैलिफोर्निया: दुनिया की बड़ी टेक कंपनी मेटा अपने CEO मार्क जकरबर्ग का एक एडवांस 3D अवतार बना रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित यह अवतार न सिर्फ जकरबर्ग जैसा दिखेगा, बल्कि उनकी तरह ही बात भी करेगा। फाइनेंशियल टाइम्स के हवाले से इंडिया टुडे ने रिपोर्ट किया है कि यह प्रोजेक्ट मेटा की AI पर फोकस करने की नई स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। खुद मार्क जकरबर्ग ने पहले कहा था कि कंपनी 'पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस' के आइडिया की तरफ बढ़ रही है।

मार्क जकरबर्ग की तरह ही होगी आवाज और बात करने का अंदाज

यह AI अवतार सिर्फ जकरबर्ग का हमशक्ल नहीं होगा, बल्कि इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह उनके बात करने का तरीका, आवाज का उतार-चढ़ाव और हाव-भाव भी कॉपी कर सके। इस सिस्टम को जकरबर्ग के पब्लिक में दिए गए भाषणों, इंटरव्यू, वॉयस रिकॉर्डिंग और उनके हाल के विचारों के आधार पर ट्रेन किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्क जकरबर्ग खुद इस डिजिटल अवतार की ट्रेनिंग और टेस्टिंग में सीधे तौर पर शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जब जकरबर्ग ऑफिस में मौजूद न हों, तब भी कर्मचारी इस AI अवतार से सवाल पूछ सकें और जवाब पा सकें। कंपनी का कहना है कि इसका लक्ष्य कर्मचारियों को यह महसूस कराना है कि CEO तक उनकी सीधी पहुंच है।

मेटा की नई 'सुपरइंटेलिजेंस लैब्स' इस प्रोजेक्ट को लीड कर रही है। इस लैब का मुख्य काम ऐसे AI कैरेक्टर बनाना है जो दिखने में असली इंसानों जैसे हों और रियल-टाइम में बातचीत कर सकें। बातचीत में देरी को कम करने और नैचुरल मूवमेंट और आवाज सुनिश्चित करने के लिए सुपरइंटेलिजेंस लैब्स पावरफुल कंप्यूटिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है।

आवाज की टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने के लिए मेटा ने पिछले साल प्ले एआई (Play AI) और वेवफॉर्म्स (Waveforms) जैसी कंपनियों को खरीदा था। इनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ज्यादा असली लगने वाली आवाज बनाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, मेटा की योजना इस AI टेक्नोलॉजी को बाद में कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को भी देने की है। इसके लिए मौजूदा AI स्टूडियो प्लेटफॉर्म को और बड़ा बनाया जाएगा।

इस बीच, कंपनी मार्क जकरबर्ग की मदद के लिए 'CEO एजेंट' नाम का एक और AI सिस्टम भी बना रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिस्टम जकरबर्ग को तेजी से जानकारी जुटाने और फैसले लेने में मदद करेगा।

मेटा अपने कर्मचारियों को रोज के काम में AI टूल्स इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दे रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि खुद मार्क जकरबर्ग हर हफ्ते 5 से 10 घंटे AI प्रोजेक्ट्स और कोडिंग पर खर्च करते हैं। AI के क्षेत्र में बढ़ते कॉम्पिटिशन को देखते हुए मेटा के इन कदमों को कंपनी को एक नए लेवल पर ले जाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।