ताइवान के 10 वर्षीय लड़के ने एक 'AI इलेक्ट्रॉनिक नाक' बनाई है। यह हवा में गंध सूंघकर विस्फोटक, ड्रग्स और बीमारी वाले मीट का पता लगा सकती है। इस आविष्कार के लिए उसे सिलिकॉन वैली में गोल्ड मेडल मिला।

आजकल के बच्चे जहां मोबाइल गेम्स में बिजी रहते हैं, वहीं ताइवान के 10 साल के एक लड़के ने एक ऐसा आविष्कार किया है, जिसकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है। इस बच्चे की बनाई 'AI इलेक्ट्रॉनिक नाक' ने सिलिकॉन वैली के एक बड़े इंटरनेशनल फेस्टिवल में सबका ध्यान खींचा है।

कौन है यह होनहार बच्चा?

इस लड़के का नाम ह्सू टिंग-वे (Hsu Ting-wei) है और वह ताइवान का रहने वाला है। कैलिफोर्निया में हुए 'सिलिकॉन वैली इंटरनेशनल फेस्टिवल' (SVIIF) में उसने अपनी 'नॉवेल आर्टिफिशियल इलेक्ट्रॉनिक नोज' को दुनिया के सामने पेश किया। इसके लिए उसे बेस्ट इन्वेंशन अवॉर्ड और गोल्ड मेडल मिला।

क्या है यह AI इलेक्ट्रॉनिक नाक?

यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो बिना छुए हवा में मौजूद गंध और केमिकल को पहचान लेती है। इसे एयरपोर्ट जैसी जगहों पर एक्स-रे स्कैनिंग मशीनों के साथ लगाया जा सकता है। यह बैग के अंदर रखे विस्फोटक, ड्रग्स या अफ्रीकन स्वाइन फीवर जैसी बीमारी फैलाने वाले मीट प्रोडक्ट्स को सिर्फ सूंघकर ही पता लगा लेगी।

बच्चे का मकसद

ह्सू टिंग-वे चाहते हैं कि उनके इस आविष्कार से बॉर्डर पर 'फेंटानिल' जैसे खतरनाक ड्रग्स की तस्करी को रोकने में मदद मिले। साथ ही, यह अफ्रीकन स्वाइन फीवर को फैलने से भी रोक सकता है। जूरी मेंबरों ने भी कहा कि उन्होंने बच्चे की उम्र देखकर नहीं, बल्कि इस टेक्नोलॉजी के भविष्य को देखकर यह अवॉर्ड दिया है। इस कॉम्पिटिशन में ताइवान से कुल 35 आविष्कार शामिल हुए थे, जिन्होंने रिकॉर्ड 24 गोल्ड मेडल जीतकर ग्लोबल लेवल पर अपनी धाक जमाई है।