भारत की जेन ज़ी (18-24) कंटेंट क्रिएशन में आगे है। 83% युवा खुद को क्रिएटर मानते हैं और 75% इसे करियर देखते हैं। यह ट्रेंड छोटे शहरों, महिलाओं और क्षेत्रीय भाषाओं को वैश्विक मंच दे रहा है।

भारत की डिजिटल दुनिया में एक नया बदलाव आया है। 18 से 24 साल की 'जेन ज़ी' पीढ़ी इस बदलाव की अगुवाई कर रही है। यूट्यूब इंडिया और स्मिथगीगर की नई रिपोर्ट के अनुसार, 83% भारतीय जेन ज़ी खुद को कंटेंट क्रिएटर मानते हैं। यह अब सिर्फ़ एक शौक नहीं, बल्कि एक असली करियर बन गया है। सर्वे में शामिल 75% जेन ज़ी इसे एक प्रोफेशनल मौके के तौर पर देखते हैं। इससे मिलने वाली आर्थिक आज़ादी डिजिटल दुनिया में युवाओं की तरक्की को और रफ़्तार दे रही है। रिपोर्ट कहती है कि 55% क्रिएटर्स को इन प्लेटफॉर्म्स से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है।

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छोटे शहरों की महिला शक्ति

रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि यह डिजिटल लहर, जो पहले सिर्फ़ मेट्रो शहरों तक सीमित थी, अब देश के कोने-कोने में फैल गई है। ज़्यादातर क्रिएटर्स मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों के बजाय टियर-2 और टियर-3 शहरों से हैं। इंदौर और जयपुर जैसे शहरों की स्थानीय आवाज़ें इंटरनेट के ज़रिए दुनिया भर में ध्यान खींच रही हैं।

इसमें सबसे शानदार कामयाबी युवा महिलाओं को मिल रही है। पिछले दो सालों में, यूट्यूब पर महिला कंटेंट क्रिएटर्स की संख्या में 40% की बढ़ोतरी हुई है। महिलाएं सिर्फ़ फैशन और ब्यूटी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, कुकिंग और व्लॉगिंग जैसे कई विषयों में भी आगे हैं।

क्षेत्रीय भाषाओं को मिल रहा महत्व

प्लेटफ़ॉर्म चुनने के मामले में यूट्यूब अब भी पहले नंबर पर है। 90% जेन ज़ी क्रिएटर्स अपनी काबिलियत और आइडिया दिखाने के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट तेज़ी से बढ़ रहा है। 42% क्रिएटर्स का कहना है कि वे स्थानीय परंपराओं और संस्कृति को एक ग्लोबल मंच दे पा रहे हैं। यह स्टडी बताती है कि भारतीय जेन ज़ी की यह तरक्की भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और ज़्यादा लोकतांत्रिक बनाएगी और क्षेत्रीय कंटेंट को दुनिया भर में पहुंचाएगी।